अजब गजब - ६९ : राजगढ़
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
मध्यप्रदेस म नेवाज अन् पारबती नदी क मंझार , मान्यागढ़ पहाडी क तलहटी बसेस राजगढ़ को किल्लो . छतरपुर पासिन राजगढ़ ५९ कि.मी. दूर स .
१. इतिहास : * राजगढ़ को पुरानो नाव झंझनीपुर / झंडेपुर होतो . वोला उमाठवारा बी कव्हत होता . राजगढ़ ला इ.स. १६४० म रावत मोहन सिंह क कार म बसायतो . तब वकी आबादी ३००० होती .
* रावत छतरसिंह को वंस परमार अन् उपवंस उमठ होतो . उमठ परमार को पहलो राज ' उमावाडा ' होतो . इ.स. १४८८ म इन ला रावत उपाधी भेटीती .
* राजधानी पह्यले दुपारिया ( शाजापुर जिलो ) , बाद म डुंगरपुर , बाद म रतनपुर अन् बाद म राजगढ़ बनी .
रावत छतरसिंह ला मोहन सिंह अन् परसरामजी असा दुय पोटुना होता . ( कयी जागा प तीन पोटुना जिकर आवस .
* इ.स. १६४५ म राजमाता ( रावत छतरसिंह जी की रानी ) क अनुमती कन् दीवान अजबसिंह महाल बनायो , जेला पाच दरुजा होता . इतवारिया , भुडवारिया , सूरज पोल , पनराडिया , नवो दरवाजो ; असा नाव का इ पाच दरुजा . राजगढ़ म राजेश्वर मंदिर , चतुर्भुज नाथजी मंदिर अन् नरसिंह मंदिर असा तीन पुराना देऊर स .
* राजगढ़ का दुय हिस्सा स , येक ला बडामहल अन् दुसरा ला राजमहल कोस . बडा महल को बांधकाम इ.स. १६४५ म चालू भयो त् राजमहाल को बांधकाम इ.. १९३१ म चालू भयो .
* ३०० बरस पुरानऽ राजगढ़ किला की राजपुर , मुगल , मालवा ' शैली ' स !
* रावत छतरसिंह क बाद रावत मोहन सिंह ( मोठो पोरग्यो ) राजो बन्यो . रावत मोहन सिंह को राज इ.स. १६३८ पासिन १६९७ वरी होतो . इ.स. १६८१ म रावत मोहन सिंह ला राजगढ़ रियासत अन् रावत परसराम ला नरसिंगगढ़ रियासत भेटी .
* १ जनवरी १८८६ , रावत बलभद्र सिंह क जमाना म , " राजा " या उपाधी भेटी .
* रावत विरेंद्र सिंह को सर्गवास २६ अक्तुबर १९३६ म भयो . वून क बाद राजा विक्रमादित्य न १४ जनवरी १९३७ पासिन राज कऱ्यो .
* इ.स. १९४८ म राजगढ़ रियासत को भारत देस म विलय भयो . वोन बेरा राजगढ़ की आबादी ८८ , ३७६ होती . ११ तोफ की सलामी होती . राजस्व रु . ४५०००० अन् प्रिवीपर्स रु. १४०००० होतो .
( सहयोग : इंजि . जालम सिंह सोढा जी , जोधपुर )
लेखक : इंजि. सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
अद्भुत इतिहासिक जानकारी
ReplyDeleteधन्यवाद नन्दलाल जी 🙏
Delete