अंधारा को पांडू भासो
( भोयरी कविता )
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
पड्यो उतानो उबडो
उठ्यो बावा कसोबसो
इज्जत को भासपालो
अंधारा को पांडू भासो ।१।
तोल तोल कन चाल्यो
पर करम को फासो
तंगड कन् घसऱ्यो गो
अंधारा को पांडू भासो ।२।
कारी निस्यानी बोट ला
जसो सिकार को ससो
इलेक्सन को बजार
अंधारा को पांडू भासो ।३।
गयो उपव उजिड
घर मंझार तमास्यो
हातपाय लटपट्या
अंधारा को पांडू भासो ।४।
रोग भस्म्यो नेताना ला
पेट भरेन गो कसो
दुइ घास ला मोताद
अंधारा को पांडू भासो ।५।
पोट्टा बाट्टाना को कल्लो
कितअ जाय कन् घूसो
जागा नही लुकन ला
अंधारा को पांडू भासो ।६।
दिवो लगायो सूर्व्या को
भयो ढग येडो पिसो
फुको तंतर मंतर
अंधारा को पांडू भासो ।७।
गयो कुईज उजिड
लाग्यो धक्को गा उलीसो
भयी चान्नी फानोफान
अंधारा को पांडू भासो ।८।
कोनुडा म दिवनाल
उजिडस येक पसो
वारो खेटस जोत ला
अंधारा को पांडू भासो ।९।
सटवाई की लेखन
भाग लिखस गो कसो
कसी पूंजी बा पाचवी
अंधारा को पांडू भासो ।१०।
रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
अच्छी रचना जी
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