Sunday, July 17, 2022

वरसार ( भोयरी कविता ). bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

वरसार 
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति 
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

पयी पाव्हना को घर
करेस पाहुनचार
पोटी जवाई की बाई
दिन भर वरसार ।१।

आतो मावसी ननद
घर बलाये कसार
चोरी बंगडी को नेम
दिन भर वरसार ।२।

आया आम्बा का पाव्हना
भासा भासी तीन च्यार
धाबा प लगाये माच
दिन भर वरसार ।३।

तेलौता की सुगंध म
मह्यके गली येटार
रान्नी ला घाडो हरीक
दिन भर वरसार ।४।

हासे चवरी को दिवो
दाठ्ठा की माया अपार
गनगोत बड वानी
दिन भर वरसार ।५।

झोको बंगई को मन
चित सपरी उदार
हासी खुसी को दाह्यजो
दिन भर वरसार ।६।

लक्सुमी की आंगवन
करे असो चमत्कार
नांदे घर म गोकुळ
दिन भर वरसार ।७।

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

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