Wednesday, July 27, 2022

यादें _ सवाल की ! भाग - ६

यादें _ सवाल की ! 
भाग - ६

स्कूल - कॉलेज के बाद हमें लगता है , अब परीक्षा से छुट्टी ! यह अंधश्रद्धा बहुत घातक होती है... आगे और इतनी परीक्षाओं से गुजरना होता है की , सभी भगवान याद आते है . जॉब के लिए भी written exam , viva , interviews और न जाने क्या क्या ! फिर promotion , specialisation के लिए परीक्षा ... साथ साथ ही सामाजिक परिवेश मे अलग ही प्रश्नपत्र हमारे इंतजार मे होते है.. 
कोई दूर के रिश्तेदार घर मे आते ही हमारी विकेट लेते है . उनके सवाल की गुगली इतनी अनपेक्षित होती है की , सिर चकरा कर आउट होना , यही परिणाम १०० फिसदी तय ! और वह सवाल होता है , ' पह्यच्यान कौन ? ' .
स्कूल - कॉलेज तक दूर के रिश्तेदारों से मिलना - जुलना रहता नही . पढाई के नाम पर पारिवारिक कार्यक्रम मे हमारी हिस्सेदारी नगण्य रहती है . जब मेलमिलाप ही नही तो पहचानेंगे कैसे ? 
' पह्यच्यान कौन ? ' इस सवाल का जवाब देने के लिए मॉं - पिताजी जो टिप्स देते है , वह सिर के ऊपर से निकल जाती .  झूठ - मुठ में ही हां में हां मिलाते और खिसक लेते . दिमाग को खंगालने के बाद भी कोई नतीजा नही निकलता .‌‌ कुएं में ही नही तो बालटी में कहॉं से आएगा ! 
कई बार चेहरा याद आता है , लेकीन नाम - गांव भूल जाते है . 
कई बार पीठ पर पहले थपकी पडती और बाद मे सवाल की मिसाइल स्मृतिघातक हमला करती , ' पहचाना क्या ? ' 
Smile line को थोडा चौडा और लंबा कर के हम हाथ मिलाते . उसकी ऑंखों में वही सवाल अब भी तैरता हुआ नजर आता है . हमारे शर्म से डुबने की हालात का वे मंद मंद मुस्कुरा कर आनंद लेते है . उनकी शारीरिक भाषा विजयी मुद्रा की .. सिकंदर जैसी और हम बगलें झॉंकते हुए पराजित मुद्रा में.. पोरस की तरह ! चेहरा कुछ कुछ याद आता है , लेकीन नाम ! स्मृति दगा दे जाती है . और एक रामबाण और रखा रहता है उनकी तरकश में ...  ' बडा आदमी बन गया.. अब क्यो पहचानेगा ...' 
' बडा आदमी ' कैसा होता है , यह हमें आज तक पता नहीं .  पर वह उस अनजान श्रेणी में हमें डाल कर स्वर्ग सुख का लेता है .      ' इधर कुंआ , उधर खाई _ जाए तो जाए कहा भाई !' हम अपने आप को कोसते रहते...
अब यह बात चेहरे पर आ कर अटक गयी . यहॉं तक ठीक है.. आगे के सवाल कर्ता और दस पायदान ऊपर ! इनकी आवाज भी memory में store करनी होती है !!!!
आपकी फोनबुक में save नही किया हुआ अनजाना नंबर वही सवाल के तीर चलाता है , ' पह्यच्यान कौन ?' app's की भरमार की वजह से caller ID app download नही किया हो तो , सोने पे सुहागा ! 
मै गाने सुन कर singers को नही पहचान पाता . अब इस दस - बीस साल पुरानी आवाज को किस क्षमता के बलबूते पहचान पाऊगा . ' नही पहचाना ' , ऐसा बोलना शिष्टाचार संमंत नही . कई कि.मी. दूर बैठे उस शख्स ने शिष्टाचार में भ्रष्टाचार किया है .... इस के लिए हम क्या कर सकते है ! 
यह ऐसी परीक्षाएं है , जिस में हमारे फेल होने की संभावना शत प्रतिशत होती है . अंकसूचि में मिले अंडे से ज्यादा खतरनाक और डरावना वह लांछन होता है , ' बडा आदमी बन गया.....' 
इस सवाल से आसान तो स्कूल - कॉलेज की परीक्षा के प्रश्न पत्र रहते थे !! 
( सहमत हो तो बजाओ ताली !).    क्रमशः ....

लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर


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