Sunday, July 3, 2022

मेरे सपने , मेरे अपने. ( हिंदी कविता ). Hindi language _ हिंदी भाषा

मेरे सपने , मेरे अपने
Hindi language _ हिंदी भाषा

विचारों का समुद्र मंथन
लगा कूर्म , वासुकी कॉंपने
हलाहल के साथ अमृत
मेरे सपने , मेरे अपने ।

मंथन की उथल पुथल
लगा रत्नाकर तडपने
याद है कुछ भुले बिसरे
मेरे सपने , मेरे अपने ‌

सुर असुर की अभिलाषा
लगी मर्यादा को भी नापने
आकांक्षा की उॅंची उडान है
मेरे सपने , मेरे अपने ।

दिति अदिति की संतान में
महामेरू भी लगा चपने
सत्य को अनसुना करते
मेरे सपने , मेरे अपने ।

हर एक के ललाट पर
लगे गुट के नाम छपने
सौदागरों के हाथ लगते
मेरे सपने , मेरे अपने ।

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर


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