अजब गजब - ९७ : अर्धनारीश्वर ज्योतिर्लिंग , मोहगांव
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
विश्वेश्वराय नरकार्णवतारणाय
कर्णामृताय शशिशेखरधारणाय ।
कर्पूरकांतिधवलाय जटाधराय
दारिद्रदु:खदहनाय नमः शिवाय ।।
देस म १२ ज्योतिर्लिंग का पावन तीरथ स , आन् येक अरधो ज्योतिर्लिंग स . मध्य प्रदेस म महाकालेश्वर अन् ओंकारेश्वर इ दुइ ज्योतिर्लिंग स . आन् साडेबारा ज्योतिर्लिंग म को अरधो ज्योतिर्लिंग बी मध्य प्रदेस म च स .
छिंदवाडा जिला क सौंसर तहसील म , महाराष्ट्र अन् मध्य प्रदेस क हद जवर सरपा नदी क काठ पर मोहगांव हवेली गांव म ' अर्धनारीश्वर ज्योतिर्लिंग स . मोहगांव हवेली सौंसर पासीन ६ कि.मी. , छिंदवाडा पासीन ६२ कि.मी. अन् नागपूर पासीन ७५ कि.मी. दूर स .
मोहगांव हवेली म भगवान भोलेनाथ अर्धनारीश्वर सरूप म बिराजमान स .
१२ ज्योतिर्लिंग आन् तिरपुर सुंदरी क मंझार क हिंद्यान पर इ तीरथ स . स्यास्तर क नुसार साडेबारावो ज्योतिर्लिंग सरपानी नदी क थडी प स . नदी को आकार सरप जसो आन् ॐ सरीखो स , असी मान्यता स . असी च सर्पा नदी , देऊर क पसचीम दिस्या म मोहगांव ला स . येनअ नदी म येक कुंड स , जे को आकार सिवलिंग जसो स . दयीत गुरू सुक्राचार्य न येनच सर्पा नदी क काठा प मोठो जप तप कऱ्योतो , असी मान्यता स . भगवान भोलेनाथ वून पर परसन्न भया . गुरु सुक्राचार्य ला दरस्यन देयो आन् अर्ध्दनारीश्वर रूप म परगट भया .
मोहगांव हवेली क अर्धनारीश्वर ज्योतिर्लिंग को दरस्यन कऱ्या बिगर १२ ज्योतिर्लिंग क दरस्यन को पुन्य अधूरो रव्हस , असी मान्यता स .
इतिहास : * अर्धनारीश्वर ज्योतिर्लिंग तीरथ पुराना जमाना पासीन स . पह्यलो देऊर को बांधकाम ८ वी सदी म , परमार काल म भयो .
* दुसरो बांधकाम १३ वी सदी म हेमाद्री पंत न कऱ्यो .
* रघुजी राजो ( नागपुर ) , राजो भोसले , राजो दलपत स्या ( देवगढ ) न येनअ देऊर की मरम्मत करी .
बांधकाम : * देऊर क चार आंग चार दरुजा स . गाभार क चारी आंग ३ - ३ दरुजा स .
* देऊर ला ३ परदकसिना पथ स . पह्यलअ आन् दुसरअ रस्ता क मंझार १२ दरुजा स , जी १२ ज्योतिर्लिंग का परतीक स . दुसरअ आन् तीसरअ रस्ता क मंझार ४ दरुजा स , जी ४ धाम का परतीक हि . येनअ तीरथ पर १२ ज्योतिर्लिंग अन् चार धाम क यातरा को पुन्य भेटस , असी मान्यता स .
* सिवलिंग अरधो कारो अन् अरधो गोरो चिट्टो स . सिवलिंग क येनअ रूप ला महादेव पाराबती को परतीक मानस .
* माघ आन् कारतिक मह्यना म सूर्व्य भगवान आपलअ किरन ज्योति कन् सिवलिंग कोई अभिसेक करस .
कालसरप दोस : सर्पा नदी को आकार सरप जसो स . तेकन येनअ तीरथ पर कालसरप दोस निवारन की पूंजा करस .
पर्व : महासिवरातरी ला यहान मेलो भरस . हर तिवार प यहान पूंजा पाठ , हरि किरतन , दही लाही होस .
येक नमन गवरा पारबती हर हर महादेव....
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
हर हर महादेव
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