Thursday, October 13, 2022

निर्माण _ भाग - १६

निर्माण _ भाग - १६
Hindi language _ हिंदी भाषा

सुबह - सुबह ऑंख लगी... सब नाश्ता कर के साइट पर गये...
' साहब , चाय लिजीए... ' खानसामा ने मुझे जगाते हुए कहा . 
' टाइम क्या हुआ ? ' मैने ऑंख मलते हुए पूछा . 
' दस बजने वाले है.. ' उसने टेबल पर चाय और पानी रखते हुए कहा . 
मै नहा - धो कर साइट पर पहुंचा . ड्रॉइंग के हिसाब से सरिया चेक कर रहा था.. कुछ गलतियां थी . साइट इंजिनिअर को बता कर कुछ सरिया और डालने के लिए बोला और नाश्ता करने वापस गया . 
आखरी सेक्शन होने की वजह से heavy reinforcement था . ३२ मि.मि.और ४० मिमि diameter की सरिया थी . एक एक बार ही ६०/७० कि.ग्र. का था . काम खत्म होने की कगार पर था और बरसात का मौसम भी शुरु होने वाला था , इस लिए हर ठेकेदार के पास बहुत कम मजदूर बचे थे . क्यों की काफी सारे मजदूर अपने अपने गांव चले गये थे . अब जितने मजदूर थे , उन्ही से काम चलाना था . 
डिपार्टमेंट के इंजिनिअर भी आ गये . अब reinforcement का measurements ले कर ढलाई ( concreting ) करनी थी . हम चाय पी रहे थे , तभी नीचे से जोर जोर से आवाज आने लगी . मुझे कुछ जबरदस्त गडबड होने की आशंका हुई . हम दौडे दौडे साइट पहुंचे . आखरी सेक्शन के स्लैब पर मजदूरों की भीड थी . सुपरवाइझर हॉंफते हॉंफते उपर आ रहा था . 
' क्या हुआ ? ' मैने पूछा . 
' साहब एक मजदूर सरिया के साथ नीचे गिरा है.. मै आपको बताने के लिए ही आ रहा था . ' सुपरवाइझर ने कहा . 
' हे भगवान !!!.... चलो नीचे...' मैने कहा . 
मुझे देख कर सब बाजू हुए.. लोहे वाले ठेकेदार का एक आदमी कंक्रिट की दिवार के बाहर गिरा था . कुछ मजदूर उसे निकालने के लिए वहॉं उतरे थे . मैने सभी मजदूरों को उपर भेजा और सबको शांत रहने की हिदायत दी . मजदूर कम होने से केवल तीन आदमी एक भारी सरिया ले कर आए थे . दो मजदूर दो कोने पर और एक ने बीच में सरिया को पकडा था . वह एक ' C ' आकार की सरिया थी . दो मजदूर इस काम के अभ्यस्त थे पर एक कोने वाला मजदूर नया था . सरिया रखते समय दो अभ्यस्त मजदूरों ने सरिया नीचे रखने के लिए छोड दी , जब की नया मजदूर उसे पकड कर ही रहा . जब भारी भरकम सरिया एक तरफ से गिरी तो दुसरी बाजू पकड कर रहने से उछली . सरिया के उछलते ही वह नया मजदूर हवा में फेंका गया और सीधा निचे गिरा . 
मजदूर उसे उपर ले कर आए . वह बाए हाथ के बल गिरा था . वह हाथ फ्रैक्चर हुआ था . साइट पर टू व्हीलर के अलावा कोई साधन नही था . मैने तुरंत अपनी स्कूटर निकाली . उस मजदूर के साथ उसके ठेकेदार को स्कूटर पर बिठा कर मै उन्हें शहर ले आया और दवाखाने मे भर्ति कराया . रात भर की थकान और यह हादसा... मै मानसिक और शारिरिक तौर पर टूट रहा था . मैने डॉक्टर से बात की , ठेकेदार को समझाया.. तब तक साइट इंजिनिअर और सुपरवाइझर वहॉं पहुंचे . मै सुपरवाइझर और ठेकेदार को वही छोड कर साइट इंजिनिअर को ले कर वापस आया . साइट आ कर डिपार्टमेंट के इंजिनिअर के साथ measurements लिए और ढलाई शुरु की . डिपार्टमेंट के इंजिनिअर को आज दिन भर साइट पर रुकने के बोला . और मै वापस दवाखाने मे पहुंचा . 
' ऑपरेशन करना होगा...' डॉक्टर ने कहा . 
' जी , आपको जो उचित लगता हो , उस हिसाब से treatment किजीए...' मैने कहा . 
' आपको अभी ५०,०००/ रुपया जमा करना होगा..' डॉक्टर ने कहा . 
' जी , मै एक घंटे के भीतर पैसे जमा करता हूं.. आप ऑपरेशन किजीए..' मैने कहा . 
अभी मेरे पास इतने पैसे नही थे.. उस शहर में मेरी एक क्लासमेट रहती थी .. वही एक उम्मीद की किरण थी . 
मै एक बार ही उसके घर गया था , इस लिए location साफ साफ याद नहीं आ रही थी.. फिर भी निकल पडा.. काफी जद्दोजहद के बाद उसका घर मिला . मुझे देख कर उसे आश्चर्य हुआ . मैने सारी राम कहानी बताई . उसने पिताजी से बात की . उसके पिताजी मेरे साथ बैंक आए .. और मुझे रकम निकाल कर दी . फिर हम दोनों अस्पताल आए . वह डॉक्टर उन से परिचित थे . हमने रकम जमा की और डॉक्टर से बातचीत की . मैने क्लासमेट के पिताजी को घर छोडा और वापस साइट पर आया . ढलाई चल रही थी . मेरे आते ही डिपार्टमेंट के इंजिनिअर ने विदा ली.. मुझे कुछ अच्छा नही लग रहा था.. शायद बुखार भी आया था.. मै साइट ऑफिस आया और कुर्सी पर बैठे बैठे ही सो गया... ( क्रमशः ) 

लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

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