भोयरी संस्कृति - ४५ : बड सावितरी
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
वटमूले स्थितो ब्रम्हा वटमध्ये जनार्दन: ।
वटाग्रे तु शिवो देवो देव: सावित्री वटसंश्रिता ।।
जेठ मह्यना की पुनो ला सवासिन बाई बड सावितरी को वरत करस . उत्तर भारत म इ वरत जेठ मह्यना क अवस ला करस . भोयरी संस्कृति म बड , पिपर , उम्बर , आम्बा , जाम्भुर क झाड को घाडो महत्त्व स . झाड झडुला म देव को बास रव्हस , असी मान्यता स . बड क मूरी म भगवान बरमा जी , खोड म भगवान बिस्नु जी अन् फानटीना ( डंगाल ) म भगवान महादेव को निवास स , असी बी मान्यता स . झाड झडुला क पूंजा कन् वून ला कोनी तोडत नी .
बड क झाड ला अमर मानस . बड को झाड डंगालना की मूरी बनायकन् खूब बाहाडस . बड सरीखोच आपरो सुहाग अखंड रह्या पायजेन , घर संसार नाती नतरा - धनधान कन् फल्या फुल्या पायजेन _ येनअ सरधा को इ मोठो साजरो तिवार !
बड सावितरी की कथा : महाभारत क वनपर्व म सत्यवान सावितरी की कथा स . भद्र देस को राजो अस्वपति आन् रानी मालवी नि:संतान होता . माय सावितरी की किरपा कन् वून ला पोटी भयी . माय क नाव परीन वोको नाव धऱ्यो - सावितरी . सावितरी दिसन ला मोठी साजरी आन् गुनवान होती . चंदर क सरीखी वा मोठी भयी . सावितरी न अंतरमन कन् सत्यवान ला आपरो लाडो मान्यो . शाल्व देस क अंधरा राजा धृमत्सेन को सत्यवान इ पोरग्यो . लढाई म हाऱ्या कन् अंधरअ माय बाप संगअ सत्यवान जंगल म रव्हत होतो . माय बाप आन् नारद मुनी न सावितरी ला खूब समझायो पर सती सावितरी आपलअ बानी पर अडीती . नारद मुनी न सांगे क , सत्यवान आबअ येकच साल बाचेन . पर सती सावितरी को इरादो नी बदल्यो . बिह्या कर कन् वा लाडा संग जंगल म रव्हन लागी . अंधरअ सासू ससरा आन् सत्यवान की सेवा करत रही . सत्यवान क आयुक्स्य का तीन दिन बाच्याता . तब पासीन सावितरी न उपास धर कन् वरत कऱ्यो . जंगल म इंधन काडी तोडन क बेरा सत्यवान ला चक्कर आयो . यमराज सत्यवान को जीव लिजान साठी आयो . सती सावितरी यमराज क पासअ पासअ जान लागी . यमराज न वोला घाडो समझायो , पर वा नी मानी . थक हार कन् यमराज न वोला तीन वरदान मांगन ला कह्यो . सती सावितरी न पह्यलो वरदान मांग्यो _ म्हरअ सासू ससरा क डोरा कन् दिसन दे . दुसरो वरदान मांग्यो _ वून को राजपाट वापिस देव . तीसरो वरदान मांग्यो _ मला संतान सुख भेट्या पायजेन . यमराज न कह्यो - तथास्तु ! सती सावितरी बोली क , लाडा बिगर पोटूना कसा होयेन ? यमराज आपलअ च बचन म फस गयो . आन् सत्यवान को जीव वापिस कऱ्यो . या घटना बड क झाड खलतअ घटी . सती सावितरी क पुन्य कन् सत्यवान को जीव बाच्यो आन् वूई सुख कन् नांदन लाग्या .
भोयरी रितीरिवाज : कोनी सवासिन बाई तीन दिन को उपास धरस त कोनी जेठ मह्यना की बड पुनव क दिन च उपास धरस . सोरा सिंगार कर कन् बड की पूंजा करन साठी जास . या पेरनी की घात रव्हस . गहू की वटी , आम्बा , कच्चो सूत , तूप को दिवो - दिवनाल , कपडो , बिडा का पान , नारेल , फुल - अकसिद - हरद कुकू , आरती लेकन पूंजा करन साठी जास . कापूस को सूत वर कन् वोकअ सात गाठ ला हरद लगावस . बड की पूंजा करस . वोला वटी वाहस . कच्चो सूत / मोली हात म लेकन बड क झाड ला सात फेरा मार कन् वोला सूत गुंडारस . कमस कम पाच सवासिन बाई की वटी भरस .
लाडो , पोटूबाटूना , घर परपंच क सुख संग च धरती माय क अखंड हिवरअ स्यालू की कामना को इ खूब साजरो तिवार .
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
हमारी बोली भाषा में अद्भुत लेख लिखा है। जय हो
ReplyDeleteBahut hi badhiya lekh
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