अजब गजब - ९४ : वांकल माता
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
राजस्थान को पाकिस्तान सरहद ला लाग्यो जिलो स बाडमेर . बाडमेर क चौहटन तहसील म ढोक नाव को गांव स . यहान क कारअ भूरअ हरनी पहाड ( हिरण डुंगर ) आन् रेती क टिब्बा मंझार पांढरफट संगमरमर पर बेजोड नक्कासी वालो " विरातरा धाम " स . इ धाम बाडमेर पासीन ५५ कि.मी. आन् चौहटन पासीन १० कि.मी. दूर स .
विरातरा धाम वांकल माय को ठानो ! वांकल माय का च वकरांगी , विरातरी , वकरायी , वांकूल , विरातरा , वांकल माता असा बी नाव स . राकसना को नास करन क बेरा माय की भंगिमा वक्र रव्हस . तेकन च ' असुरसंहारिणी " की गरदन टेढी रव्हस ! टेढी गरदन क कारन च माय को नाव पड्यो , ' वांकल माता विरातरा ' .
यहान पहाडी ( भूरा भाखर ) क पायथा जवर खूब मोठो अन् साजरो इ देऊर स . आन् ११०० फीट उच्ची येनअ पहाडी पर स गढमंदिर आन् ठंडो पानी को कुंड . चोटी पर च आदुपुरा गुफा, पुरानो विरातरा देऊर , वैरथान माता मंदिर स . यहान क कुंड म बाराईकार पानी रव्हस . येनअ पहाडी पर चेंगन साठी १५५ पायरीना स . देऊर क चारी आंग खूब मोठो ' ओरण ' ( देवराई ) स .
इतिहास अन् मान्यता : * वांकल माता भगवान बरमा जी की दत्तक पोटी स , असी मान्यता स .
* देऊर क सिलालेख म इतिहास की जानकारी देईस . २००० साल पह्यले समराट विक्रमादित्य न पर मुलुख का हमलावर स्यक लोगना ला हारायो . आन् तब पासीन बिकरम संवत् सुरू कऱ्यो . येनअ युद्ध क बाद समराट विक्रमादित्य न सुदूर बलुचिस्तान पर विजय अभियान कऱ्यो . बलुचिस्तान क मकरान पहाडी म हिंगलाज माय को स्यक्तिपीठ स . यहान सति को मस्तक पड्योतो . राकस लोगना को नास करन साठी समराट विक्रमादित्य न हिंगलाज माय को आसीरवाद लेयो . आपरो विजय अभियान सफल करन क बाद समराट विक्रमादित्य न माय हिंगलाज की आराधना करी आन् माय ला कह्ये क तुमी आमारअ संग उज्जैन ला चालो . माय न कह्ये क , म्हरो आवनो नी होत . तुमी म्हरअ स्यक्तिपीठ ला लिजावो . पर येक अट स क , तुमी पासअ नी देखन को . अगर तुमी न पासअ देख्यो त , मु वहान च थांबून .
* समराट विक्रमादित्य आन् लाव लस्कर हिंगलाज माय की मूरती लेकर वाहासिन निकऱ्या . ढोक गांव जवर दिन बुड्यो . या जागा मुक्काम करन साठी साजरी होती .यहान समराट विक्रमादित्य न रात कन् आराम कऱ्यो , तेकन जागा को नाव पड्यो , ' विरातरा '! रात कन् राज्या न मूरती ला आदुपुरा गुफा म धरीती . सकारी राजा ला दिस्या को भरम भयो आन् गलती कन् पसचीम म देख्यो . तब आकासवानी भयी , आब म्हरी थापना यहान च होयेन . राजा न वांकल माय की वहान च थापना करी आन् देऊर बांध्यो .
* इ.स. १७५२ म जयसलमेर को राज्यो महारावल अमरसिंग न यहान वीर घंटा चढाई .
* वांकल माता का पूजारी पवार राजपूत च स .
* वांकल माय को येक देऊर उमरकोट ( पाकिस्तान - सिंध ) म बी स .
* सिंध इलाखा सिन भोयर समाज को सम्बन्ध दुय हजार बरस पह्यलअ पासीन च स .
* वांकल माय ला हिंगलाज माय को च रूप मानस .
मेला : * विरातरा धाम ला साल म तीन बेरा मेलो भरस . चईत , माघ , भादवा मह्यना क उजरी ( चांदन्यो ) १३ , १४ , १५ तिथि ला यहान मेलो भरस . मेला म दूर दूरीन भगत आवस .
वांकल माय की आरती
जय वांकल माता , मैया जय वांकल माता ।
सब के घर में बिराजे , सुख सम्पति दाता ।।
ॐ जय वांकल माता ।टेर।
कोई कहे बंकेसवरी , कोई कहे बीसल माता ।
वांकल नाम से पुकारे , तू ही खडक माता ।।
ॐ जय वांकल माता ।
दीपली भाखरी में बिराजे , उम्मेदनगर में आता ।
एक बार दर्शन से , मन शान्ति पाता ।।
ॐ जय वांकल माता ।
हमारे घर की देवी , तू ही कुलदेवी माता ।
नवमी को जो पूजे , दुःख नही भरमाता ।।
ॐ जय वांकल माता ।
दया करो हे देवी , हमें कुछ नही आता ।
हम तुम्हारी शरण में , तुम ही कृपा दाता ।।
ॐ जय वांकल माता ।
वांकल माता जी की आरती , जो नियमित गाता ।
माताजी की शक्ति से , भक्ति मुक्ति पाता ।।
ॐ जय वांकल माता ।
जय वांकल माता की .
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
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