बेकरार बचपन
बचपन _
संग अनामिक डर
घर का अनुशासन
भविष्य की परवाह
वर्तमान उलझन ।
बचपन _
पढ़ाई के साथ साथ
छोटी - मोटी अनबन
घर के काम काज का
सिर पर है टेंशन ।
बचपन _
जिद प्रथम आने की
व्यक्तित्व का आलेखन
अच्छा बनने की राह
न रीति का उल्लंघन ।
बचपन _
विश्व सिमित दायरा
विशाल ख्वाब दर्पण
बडा होने की ललक
कचोटता बचपन ।
बचपन _
कुछ खट्टा कुछ मीठा
दायित्व का भी वजन
कुछ नादानियां भोली
परेशानियों का बन ।
बचपन _
गंभीरता की परत
मतलब की घुटन
छटपटाता भीतर
बेकरार बचपन ।
रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
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