डायरी - २०२२
लिफ्ट : भाग ३
यामाहा बाइक मेरी जान थी . कभी कभी उसे भी साइट पर लेके जाता था . आज कार की चाबी की बजाए यामाहा की चाबी ली . उसे उंगलि में घुमाते हुए सुदर्शनचक्र की फील महसूस की.. जैसे मै साक्षात सुदर्शनचक्र धारी भगवान श्रीकृष्ण !
स्टार्ट करते ही उसकी आवाज कालोनी मे गुंजने लगी . हेल्मेट का शिरस्त्राण सर पर चढ़ाया और निकल पडा अपनी ही मस्ती में ! सवारी पहले पहुंची पेट्रोल पंप . पेट्रोल भर कर बाइक की टंकी को बडे प्यार से थपथपाया ; और ट्रैफिक देखते हुए सडक पार की.
' टी प्वॉइंट ' पर स्कूल युनिफॉर्म पहनी एक लडकी लिफ्ट मांग रही थी . उस सडक पर तीन स्कूल थे . मैने सोचा स्कूल बस छूट गयी होगी , इस लिए यह लडकी लिफ्ट मांग रही होगी . वैसे मै लिफ्ट देना टालता हूं . लेकीन आज मूड अच्छा था . मैने बाइक उस के पास रोक दी .
' कौन से स्कूल जाना है ? ' मैने पूछा .
' बस , आगे ही जाना है . ' बाइक पर बैठते हुए लडकी ने जवाब दिया .
मैने मन ही मन सोचा , चलो आज किसी के काम आया...
उस लडकी ने स्कूल बैग आगे हमारे बीच पकडा था . मै अपनी ही धून में बाइक चला रहा था . टोलनाका पार हुआ . यहाँ से आगे बस्ती बहुत ही कम थी .
' बैग से आपको तकलीफ हो रही है क्या ?' लडकी ने पूछा .
' नही तो . तुम इत्मिनान से बैठो..' मैने कहा .
फिर भी उस लडकी ने बैग पीठ पर लटकाया और सामने सरक गयी . अब हडबडाने की बारी मेरी थी . मै सहम कर बाइक चलाने लगा . अब वह इतनी सट कर बैठी थी की बाइक की गति कम - ज्यादा होने पर उसका स्पर्श मेरी पीठ को हो रहा था . मेरा सोचना बंद हो कर अब सारा ध्यान लडकी की हरकतों पर था .
बाये हाथ पर पहला स्कूल आया . मैने बाइक धीमी की .
' इस स्कूल मे जाना है ना ? ' मैने पीछे देखे बिना पूछा .
' नही , आगे जाना है.' उसने जवाब दिया .
मैने सोचा , और दो स्कूल बचे है , उस में से कोई होगा .
अब उस लडकी के हाथ कभी कंधें पर , कभी पीठ पर , कभी...
मै असहज महसूस कर रहा था.. मेरे अच्छे मूड की ऐसी तैसी हो गयी थी .
' आप पुलिस मे है क्या ?' लडकी ने पूछा .
' नही..' मैने दो टूक जवाब दिया .
आगे दाये हाथ पर दुसरा स्कूल आया . मैने राइट इंडिकेटर ऑन किया .
' अरे नही... यहॉं नही उतरना है...' इंडिकेटर बझर की आवाज सुन कर लडकी ने कहा .
मेरा माथा ठनका .
' ठीक है.. और तुम ठीक से बैठो .' मैने झल्लाकर कहॉं . ( क्रमशः )
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
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