अजब गजब - ९३ : निलकंठेस्वर मंदिर
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
मस्तके शशि धारणं असुर जलंधर मर्दनं ।
हलाहल पीत्वा यत् प्रभु उच्यते ।।
परमार / पवार राजा आन् लोगना बी परम सिवभगत होता अन् स . आपलअ गवरवस्याली राजपाट क बखत वून न कई भगवान महादेव का देऊरना बांध्या . आन् जुनअ पुरानअ देऊरना को उध्दार बी कऱ्यो .
मध्यपरदेस क विदिशा जिला म गंज बासौदा तहसील स . वासीन १६ कि.मी. दूर , बुंदेलखंड क हद प उदयपुर गांव स . चक्रवर्ती राजा भोज को वंसज राजा उदयादित्य को येनअ इलाखा पर राज होतो . राजा उदयादित्य परम सिवभगत . वून न उदयपुर ( उदयपुर नाव येनअ च राजा क नाव परीन पड्यो . ) म बि . संवत् १११६ पासीन ११३७ वरी ( इ.स. १०८० - ८१ वरी ) २१ बरस म निलकंठेस्वर मंदिर बांध्यो . वोनअ बेरा उदयपुर / गंज बासौदा उत्तर - दकसिन बेपारी रस्ता को मोठो ठानो होतो , मोठी पेठ होती .
निलकंठेस्वर मंदिर ला च राजा उदयादित्य क नाव परीन " उदयेस्वर मंदिर " बी कव्हस . देऊर क आघ च वेधस्याला स .
* मंदिर की रचना : + परमार कार क देऊरना म जास्ती ' भूमिजा शैली ' को बांधकाम दिसस . निलकंठेस्वर मंदिर बी ' भूमिजा शैली ' म च बांध्येस . खजुराहो देऊर सरीखी येनअ देऊर की नक्कासी स .
+ निलकंठेस्वर मंदिर ला तीन आंगअ तीन मंडप आन् दरुजा स . गरभ घर क दरुजा प दुय आंगअ मानव रूप म माय गंगा अन् माय जमुना की मूरती स . भवताल दिक्पाल , दुरगा माय , गनपति बाप्पा , भगवान बरमा जी , भगवान बिस्नू जी , सिव गन , यकस्य , नटराज , कारतिक भगवान की मूरतीना स .
+ निलकंठेस्वर मंदिर की उचाई ५१ फीट स . ( पाच तल्ला )
+ सिवलिंग की गोलाई ५'१" स .
+ जमीन पासीन सिवलिंग ६'७" वरतअ स .
+ जलहरी सवातीन फीट वर स .
+ चवकोन जलहरी को नाप २२'४" स .
+ भोजपुर क सिवलिंग सरीखो च इ सिवलिंग स .
+ देऊर को नक्सो देऊर क हर खंड पर काहाडेस .
+ देऊर अन् सिवलिंग की रचना असी करीस क सकार की सूर्व्य भगवान की पह्यली किरन
बराबर सिवलिंग पर पडस आन् सिवलिंग सोना सरीखो झलारस . असो वाटस क सूर्व्य भगवान पह्यलो नमस्कार निलकंठेस्वर भगवान ला करस आन् बाद म दुनिया म घूमस .
+ वोनअ बेरा खगोल - भूगोल , इंजिनिअरिंग , कलाकुसर , बांधकाम को केतरो उन्नत ग्यान होतो , यको अंदाजो इ देऊर देख कन् आवस .
+ निलकंठेस्वर महादेव क सिवलिंग ला पीतरी कवच रव्हस . खास मवका पर च वोनअ कवच ला काहाडस .
* मेला : महासिवरातरी ला निलकंठेस्वर देऊर म पाच दिवस को मेलो भरस .
हर हर महादेव...
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
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