Sunday, May 22, 2022

निर्माण : भाग ७

निर्माण : भाग ७

जहॉं हादसा हुआ था , वहॉं भीड इकठ्ठा हो गयी . मजदूर हाथों से मिट्टी निकाल रहे थे.. फावडे / बेलचे का इस्तेमाल मिट्टी में दबे बुजुर्गों को चोट पहुंचा सकते थे . वृध्दा बार बार अपने पति को पहले निकालने के लिए बोल रही थी.. कुछ समय बाद उस बुजुर्ग की पीठ दिखी . वह मिट्टी भरने के लिए झुका था , और उसी अवस्था मे यह हादसा हुआ था . भगवान की कृपा से वह बुजुर्ग जीवित था . मेरे जान मे जान आई . दोनों को निकाल कर कालोनी स्थित लघु चिकित्सा केंद्र मे ले गये . मिट्टी की गर्मी से बुजुर्ग मजदूरों का शरीर लाल हो गया था.. मानो किसी भट्टी में भूने हो ! डॉक्टर ने कहा , घबराने की जरूरत नही.. कोई बाहरी या अंदरुनी चोट भी नहीं है ... हां , दो तीन दिन के आराम की आवश्यकता है . ठेकेदार के साथ उन दोनों मजदूर को लेबर कैम्प भेज , मै दवाईयां लाने गया . 
इस हादसे से मेरा दिमाग घूम गया था . अच्छा हुआ कोई जानमाल का नुकसान नही हुआ . अगर होता तो.... रात भर नींद नही आई . 
सुबह तैयार हो कर मै डिपार्टमेंट के ऑफिस गया . 
' कल के हादसे की खबर आपको मिली होगी . एक सेप्टिक टैंक आपको प्ले ग्राउंड की ओर लेना होगा . इस से खुदाई की गहराई बहुत कम हो जाएगी और मेन्टनेन्स के लिए भी सुविधा जनक होगा . मैने अधिक्षक अभियंता से कहा . 
' चलो , साइट पर चलते है .' अधिक्षक अभियंता ने कहा . 
हम हादसे वाली जगह पर पहुंचे . बाकी इंजिनिअर भी आये . साइट का मुआवना करने के बाद वे मेरा सुझाव मान गये . 
अब मुझे कोई खतरा मोल नही लेना था और समय की भी कमी थी . मैने खुदाई मशीन का इंतजाम किया . नये कार्य के हिसाब से लेवल ली , वर्किंग ड्राइंग बना कर approval लिया . तुरंत नये अलाइनमेंट , ग्रेडियंट फिक्स किये और खुदाई की मार्किंग की . सभी बिल्डिंग वर्क रोक कर सारे मजदूर , मिस्त्री इसी काम में लगा दिये . दो सप्ताह में सेनेटरी पाइप लाइन बिछ गयी . खुदाई मशीन से सभी नालियां पाट दी . अब केवल तीन सेप्टिक टैंक और मेनहोल्स का काम ही बचा था . अगले सप्ताह वह काम भी प्रारंभ किया . प्ले ग्राउंड के पास नये सेप्टिक टैंक का PCC वर्क चल रहा था . मै ऑफिस मे था . तभी उस काम पर गया सुपरवाइझर आया . 
' साहब , इंजिनिअर साहब आए थे , उन्होंने काम बंद करने के लिए कहा है..' उसने कहा .
' क्यों ?' मैने पूछा . 
' पता नहीं साहब .' सुपरवाइझर ने कहा .
' बिना कारण के काम बंद नही होगा . जाओ , काम चालू रखो .' मैने कहा . 
कुछ समय बाद इंजिनिअर मेरे पास आए . 
' मैने काम बंद करने के लिए बोला था . काम बंद नही किये !' उन्होंने कहा . 
' काम क्यों बंद करना है , यह तो बताईए..' मैने कहा . 
' बडे साहब ने बोला है.‌ ' उन्होंने बताया . 
' बडे साहब ने बोला है , ठीक है . पर कारण तो बताया होगा ?' मैने पूछा .
' नही . कारण नही बताया..' उन्होंने कहा . 
' तो क्या बिना मतलब काम बंद कर दे ?' मैने पूछा . 
' देखो , आपकी मर्जी...' उन्होंने जाते हुए कहा . 
एक समस्या सुलझती नही की , दुसरी मुसीबत तैयार रहती है... 
अगले माह से वर्षा ऋतू प्रारंभ होने वाला था..‌ इस महिने में काम पूर्ण करना जरूरी था .. लेकीन साहब लोगों की साहबगिरी सातवें आसमान पर ! ( क्रमशः )

लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

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