दिवठानी
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
रूप लक्षुमी को लाडी
सोभे गरा येकदानी
पाच जोत की झलारे
मांडव म दिवठानी ।१।
वोला हिलगाये पाड्डो
गाये दायजा कहानी
धऱ्यो पाड्डा प दायजो
पानदान खानदानी ।२।
पाच वान को दायजो
नातागोता की निस्यानी
वोला देख देख कन्
डोरा म आवस पानी ।३।
जसी जोत थरथरे
तेज लह्यर क वानी
उसी पिवरअ खेंडा म
लाडी होस पानी पानी ।४।
बोह्यला पर को पीढ़ो
ज्याने मन की कहानी
रंग हरद को सोनो
रचे नई जिंदगानी ।५।
रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
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