Monday, May 2, 2022

दिवठानी ( भोयरी कविता ). bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

दिवठानी
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

रूप लक्षुमी को लाडी
सोभे गरा येकदानी
पाच जोत की झलारे
मांडव म दिवठानी ।१।

वोला हिलगाये पाड्डो
गाये दायजा कहानी
धऱ्यो पाड्डा प दायजो
पानदान खानदानी ।२।

पाच वान को दायजो 
नातागोता की निस्यानी
वोला देख देख कन्
डोरा म आवस पानी ।३।

जसी जोत थरथरे
तेज लह्यर क वानी
उसी पिवरअ खेंडा म
लाडी होस पानी पानी ।४।

बोह्यला पर को पीढ़ो 
ज्याने मन की कहानी
रंग हरद को सोनो
रचे नई जिंदगानी ।५।

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

No comments:

Post a Comment