Wednesday, May 11, 2022

दाआजी ( भोयरी कविता ). bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

दाआजी
 Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

आमी नान्हा , दाआजी खरा की मेढ
चांद सूर्व्या वानी पाथ म फिरनो
जवारी का कनीस हाथर कन
दाना निकरत वरी गा चुरनो ।

सुदा - बुदा बिचार उपनन ला
हवा देख कन तिवा ला मांडनो
दानो खरा म , भूसो दूर खेत म
असो अनुभव को ग्यान सांगनो ।

आरोधुरो जिंदगी को लिख कन
दाआजी की सुदी बाट दिखाडनो
दुय बात समझाय कन सांगी
नाव गाव ला नी होतो हेदाडनो ।

पहाड सरखा हिम्मत का कप्पा
अंधारी रात म चंदर चांदनो
रूप दुसरो भोरो भोल्यानाथ को
वून ला स्यबद म कसो बांधनो ।

वून् क जाना कन् सऱ्यो नान्होपन
मोठअ पन को जू खांदा प धरनो
हर घडी हर पल डोरा आघ
हात आबअ सिरफ याद करनो ।

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

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