दीठ
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
दुख दवडी ला भारी
आट्यो घटी म च पीठ
लागी नजर बुहारी
कसी काढबोन दीठ ।१।
घुप अंधारो नसीब
अगास बी कारोकिट
भयो नांदतअ गाव को
बापा सुनसान रीठ ।२।
भयी जिंदगी की वारी
हर रोज पायपीट
आबअ हलाव इट्ठल
पाय खलतअ की इट ।३।
जीव आदमुस्या आयो
रोज आवस गा झीट
म्हरी अलोनी जिंदगी
सऱ्यो आसू को बी मीठ ।४।
आस सास उखड्यास
आबअ आखरी की बाट
रामनाम को गजर
धाम समस्यान घाट ।५।
रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
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