Monday, March 21, 2022

येक नान्ही सी कविता. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

येक नान्ही सी कविता
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

_ येक नान्ही सी कविता
अगास म उड कन्
मन क झुला प झुली
दुनियादारी मंझार
सुख दुख म जी घुली ।१।

_ येक नान्ही सी कविता
फूल को सुगंध लेय
घर दार म फयली
सिलसिलो सवाल को
सीग भर कन् पायली ।२।

_ येक नान्ही सी कविता
आंगवन की घाडीच
टावर टिवर टाली
दुडदुड दवडस
पैरी पयजन बाली ।३।

_ येक नान्ही सी कविता
फूल वानी सकवार
गाल प गूंजा की लाली
दुय बेनी भावना की
काकन की खलबली ।४।

_ येक नान्ही सी कविता
हिरा मोती की खदान
नवरस भरी ढोली
वोकअ मुंडा मिन झरे
गोड भोयराऊ बोली ।५।

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

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