येक नान्ही सी कविता
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
_ येक नान्ही सी कविता
अगास म उड कन्
मन क झुला प झुली
दुनियादारी मंझार
सुख दुख म जी घुली ।१।
_ येक नान्ही सी कविता
फूल को सुगंध लेय
घर दार म फयली
सिलसिलो सवाल को
सीग भर कन् पायली ।२।
_ येक नान्ही सी कविता
आंगवन की घाडीच
टावर टिवर टाली
दुडदुड दवडस
पैरी पयजन बाली ।३।
_ येक नान्ही सी कविता
फूल वानी सकवार
गाल प गूंजा की लाली
दुय बेनी भावना की
काकन की खलबली ।४।
_ येक नान्ही सी कविता
हिरा मोती की खदान
नवरस भरी ढोली
वोकअ मुंडा मिन झरे
गोड भोयराऊ बोली ।५।
रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
बहुत ही सुन्दर रचना
ReplyDeleteधन्यवाद जी 🙏🙏
Deleteफारच सुंदर कविता
Deleteधन्यवाद जी 🙏🙏
Deleteखूप साजरी कविता
ReplyDeleteधन्यवाद जी 🙏🙏
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