Sunday, March 13, 2022

अजब गजब - ८९ : राजगढ़ रियासत. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - ८९ : राजगढ़ रियासत
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

मध्य प्रदेस म राजगढ़ को जिलो स . राजगढ़ या उमठ परमार राजपूत की रियासत होती . मालवा पठार क महादेव मुखी काठ प , मान्यागढ़ पहाडी क पायथा सीन , नेवाज - पारबती नदी क मंझार ' राजगढ़ रियासत ' होती . राजगढ़ छतरपुर पासीन ५९ कि. मी. दूर स . 
राजगढ़ पह्यले भील राज की राजधानी होती . वून की कुलदेवी ' माय जालपा ' . माय जालपा को देऊर आबअ बी राजगढ़ म स . मान्यादेवी को खंडारो भयो देऊर आन् एक कुंड क काठा पर स्वर्गेस्वर महादेव देऊर स . राजगढ़ म तकिया ताल , भवानी धरन , कजालिया तलाव स . राज राजेस्वर देऊर , चतुरभुजनाथजी देऊर , नरसिंह जी देऊर , हनुमान जी को देऊर , इ पुराना देऊर राजगढ़ की सोभा स . 
राजगढ़ म बडामहल ( मोठो महाल ) इ.स. १६४५ म बांध्यो आन् राजमहल इ.स. १९३१ म रावत विरेंद्र सिंह राजा क कारकीर्द म बांध्यो . 
राजगढ़ को पुरानो नाव झंझनीपुर , झंझेपुर , उमठवारा होतो . 
इतिहास : * पन्ना को राजो हिरदे स्याह न पह्यले यहान बसती बसाई , असी मान्यता स . 
* यहान क उमठ परमार राजाना ला इ.स. १४४८ म " रावत " या उपाधि भेटी . 
* राजा छतर सिंग ला तीन पोटूना होता . मोठो मोहन सिंग , मंडोट जगन्नाथ सिंग आन् नान्हो प्रेम सिंग ! राजा छतर सिंग क बास्त राजगादी प मोठो पोरग्यो मोहन सिंग बस्यो ( इ.स. १६३८ - इ.स. १६९७ )  , तब वून की उमर सिरफ १५ बरस की होती . तेकन राज कारभार की जिम्मेदारी दीवान अजब सिंग न संभाली . राजमाता ( रावत मोहन सिंग की माय ) क अनुमती कन् इ.स. १६४५ म दीवान अजब सिंग न राजगढ़ क पहाडी भाग बस्यो भील राज संग लढ़ाई कर कन् वून ला हाराये . अन् वोकअ बास्त वहान बडामहल ( मोठो महाल ) बांध्यो . महाल ला ५ दरुजा स . ( इतवारिया , भुडवारिया , सूरजपोल , पनराडिया अन् नया दरवाजा ) .
* झांझरपुर म राजधानी बसाडी , महाल बांध्यो तब पासीन नाव पड्यो - " राजगढ़ "!
* इ.स. १९०८ म राजगढ़ रियासत का ७ परगना होता . ( नयालगंज , बियोरा , कालीपीठ , करनवास , कोटरा , सोगरगढ़ , तलेन ) .
* इ.स. १९३७ म रावत विरेंद्र सिंग को पोरग्यो रावत विक्रमादित्य सिंग राजगादी प बस्यो , तब वून की उमर १ बरस की होती . जब वूई जवान भया , तब देस आजाद भयो ‌ . वून क राज म च इ.स. १९४८ म राजगढ़ रियासत को स्वतंत्र भारत देस म विलय भयो . 
* राजगढ़ क राजगादी ला ११ बंदूक की सलामी को मान होतो . वून ला १,४०,००० रुप्या को प्रिविपर्स ( तनखो ) लागू होतो . 
* आबअ राजा रावत वरूणादित्य सिंग बहादुर परमार ( उमठ ) जी राजो स . 

लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

3 comments:

  1. बहुत ही अच्छी इतिहासिक जानकारी

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  2. इतिहास के बारे में नई नई जानकारी मिलती है। धन्यवाद

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  3. बहुत सही जाणकारी

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