Tuesday, September 15, 2020

भोयर अन् नदी माय : २ : वर्धा नदी. bhoyar people _ भोयर लोग

भोयर अन् नदी माय - २ : वर्धा नदी
भोयरी संस्कृति ला वर्धा नदी ' वरदायिनी ' स . मध्यप्रदेस क बैतूल जिला की मुलताई तहसील क वरधन सिखर ( वर्धन शिखर ) परीन वर्धा नदी को उगम होस . मुलताई जवर को खैरवानी गाव , वर्धा नदी को जलम गाव . भोयरी संस्कृति मऽ वर्धा नदी ला खास महत्त्व सऽ . 
इरयी , वेना , पोथरा , बेंबळा , निरगुडा , जाम , कार इ वर्धा नदी की मुख्य उपनदीना स . 

१. इतिहास :  * वसिस्ठ पुरान मऽ वर्धा नदी को नाव ' वरदा ' स , आन् वसिस्ठ रिसी न वर्धा जवर क केळझर म ' वरद विनायक ' की स्थापना करीस . 
* वर्धा नदी ' वराह ' क मुंडा मिन निकरीस . वराह भगवान बिस्नूदेव को अवतार ! वर्धा नदी को पह्यलो नाव ' वराह ' . आसिरवाद देनीवाली वरदायिनी , तेकन दुसरो नाव वरदा . आबऽ आमी कव्हजे वर्धा माय .
* पूर्व इतिहास काल म विदर्भराज ' यज्ञसेन ' संगऽ वोको चुलत भाई माधवसेन आन् माधवसेन को सोबती ' अग्निमित्र ' क फऊज की लढाई भयी . येनऽ लढाई म विदर्भराज यज्ञसेन हाऱ्यो आन् वोला समझोतो करनो पड्यो . तब पासीन वरदा नदी विदर्भ राज की विभाजक सीमा बनी . 
* ' ऐन - इ - अकबरी ' म वरदा नदी को उगम ताप्ती माय क उगम पासीन १० कुरो दूर स , असो उल्लेख स .
* इंग्रज क जमाना मऽ इ. स.  १८६२ ला ' वर्धा ' जिलो बन्यो . येन जिला की उत्तर , पश्चिम , दकसिन हद वर्धा नदी कन् बनी आन् वर्धा नदी क नाव परीन नाव देयो ' वर्धा जिला ' . तब जिला की कचेरी पुलगाव जवर कवठा गाव म होती .  इ. स. १८६६ ला पालकवाडी गाव म कचेरी लायी आन् नवो वर्धा स्यहर बसाडे . तब पासिन वर्धा जिला की कचेरी वर्धा म स . 

२ . संस्कृति : आर्वी पासिन जवर च वर्धा नदी पर विदर्भ की पुरानी राजधानी  " कौंडण्यपूर " स. कौंडन्यपूर ला च कुन्डिनपूर , कुंडिनी , कुंडलपूर , विदर्भ , विदर्भा बी नाव स . यहान महापास्यान जुग पासिन ( ४००० बरस पासिन ) साहा संस्कृतीना नांदीस . पह्यली ४००० बरस पासिन , दुसरी २८०० बरस पासिन , तीसरी २३०० बरस पासिन , चवथी सातवाहन काल , पाचवी वाकाटक - राष्ट्रकुट काल , साहाव्वी मध्ययुगीन काल पासिन ! 
* भगवान सिरी राम की बय इंदुमती ( राजा दसरथ को दाआजी ' राजा अज ' की रानी ) ,  अगस्ती रिसी की लाडी लोपामुद्रा , भगवान सिरी किस्न देव की बय पद्मावती ( माय की माय ) , नल राजा की रानी दमयंती आन् गंगा माय ला भूलोक पर ल्यावनी वालो राजा भगिरथ की माय ' केशनी ' कौंडन्यपूर की च ! 
* आन् सबन ला च ठाव स वा भगवान सिरी किस्न देव की रानी रुखमनी माय बी यहान की च !!!!
* भगवान राम किस्न सिन वरदा माय को असो साजरो नातो . वर्धा माय क पोटीना न इतिहास घडाये... संस्कृति की रचना करी !!!!!!!!!
३ . उत्सव : *  वर्धा नदी को उद्गम ठिकान मुलताई पासिन ११ कि.मी. पर खैरवानी गाव जवर स . यहान कपिल मुनी न तप करेतो , असी मान्यता सऽ . राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी यहान आयाता . भूदान आंदोलन क बेरा विनोबा भावे जी बी यहान आयाता . यहान नानोसो कुंड आन् घाट स . घाट पर भगवान सिवजी आन् वर्धा माय को देऊर स . मकर संगरात् ला यहान तीन दिन की यातरा भरस . आन् ' गायत्री महायज्ञ '  बी  होस .
* देवळी जवर रोहनी ( राव ) गाव स . यहान को कोटेस्वर सिवमंदिर मनजे कासी च ! वर्धा माय यहान महादेव मुखी होयकन् देऊर ला येढो मारस . वसिस्ठ रिसी न यहान येक कोटी आहुती होम कऱ्यास , तेकन इ नाव पड्यो , असी मान्यता सऽ . नदी क वोन काठ खटेस्वर मंदिर स . महासिवरातरी ला यहान मोठी यातरा भरस .
* चंद्रपूर जिला म घुग्गुस जवर क ' वढा ' तीरथ ला इठ्ठल रखुमाई को परसिध्द देऊर स . वढा ला वर्धा , पैनगंगा आन् निरगुडा नदी को ' त्रिवेणी संगम ' स . नदी क दुसरऽ थडी पर जुगाद गाव म भगवान महादेव को पुरानो देऊर स . कारतिक पुनव येन संगम पर तीन दिन की यातरा भरस . 
* वर्धा नदी क काठ पर खांडक्या बल्लालस्या राजा न बल्लारस्या ( बल्लारपूर ) नगर बसाडकन् किल्लो ( गढ ) बांध्ये . यहान मारखंड रिसी आन् महामाया को देऊर स . 
* बल्लारपूर क आघऽ वर्धा नदी पर राजुरा इ तहसील को ठिकान स . ११ वी स्यताब्दी म यहान परमार राज होतो . वोनऽ बेरा को ' सोमेस्वर मंदिर ' राजुरा आन् आपली बी स्यान स . यहान बी महासिवरातरी ला यातरा भरस . 

# राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी न साबरमती माय पासिन देस सेवा की सुरवात करी ..बाद म  वर्धा माय क जवर सेवाग्राम ला आपलो ठिकानो बनायकन्  वोला दुनिया म मान देयो .
# वर्धा माय क कोरा म भोयरी संस्कृति ला आसरो भेट्यो . वोक ऽ सुपिक माती मऽ जवारी , गहू , कापूस , संतरा क फसलकन् भोयर समाज सधन भयो . वर्धा माय न भोयर समाज ला आसरो देकन पाले , पोसे च नी त् खूब बाहाडाये बी !
" तोरी महिमा अपार वरदा माय , तोरी किरपा अपरंपार ." 

लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर .



10 comments:

  1. That's rarest part I heard of. Thank you.

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  2. आपल्या समाजाला वरदान असलेल्या वर्धा नदिचे महत्व पटवून देणारा खुपच छान लेख आहे..........

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  3. Deshmukh ji aapka sadprayas aur sadsahitya aane wali pidhi ke liye dharohar sabit hoga.
    Bhagwan aapko sadaiv swasth sukhi sampann aur dirghayu banaaye rakhe.

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    1. आपकी शुभकामनाए , आशिष एवं मार्गदर्शन के लिये धन्यवाद सर...

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  4. वर्धा नदी ।।।। सविस्तर वर्णन

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  5. वर्धा माई की खूब साजरी माहिती.

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