भोयरी संस्कृति - २८ : हाडपख , अखरपख
Bhoyar people _ भोयर लोग
ॐ पितृ दैवतायै नमः ।।
Language of the article : bhoyari dialect _ भोयरी बोली
भोयरी संस्कृति मऽ भादवा कऽ पुनव पासिन हाडपख लागस . भादवा कऽ चांदनी ( उजरी ) चवदस ( अनंत चतुरदसी ) ला गनपति सिराये क दुसयऽ दिन पासिन हाडपख चालू होस .
१ . पितरपख : * हाडपख ला पितृपक्ष , पितरपख बी कोस . भोयर संस्कृति मऽ पितरपख क सोरा दिन पितर ला याद करकन् वून की पूंजा करस .
* पितर पूंजा की परथा वेदकाल पासिन स . पितर पूंजा कन् पूंजा करनीवाला ( वंसज ) ला धन , सुख , बरकत आन् स्यक्ति भेटस , असी मान्यता सऽ .
* माय - बाप असा परिवार का मानुस - बाई गुजऱ्या पर वून क स्यांती साठी , याद साठी सरधा कन् ज्या पूंजा करस वोलाच पितर सराध कोस .
* पितरपख म पितर ला याद करकन् वून की सेवा करस .
* भोयरी संस्कृति मऽ मानुस पर पितर रिन , देव रिन आन् रिसी ( गुरू ) रिन ला मुख्य मानेस .
* पह्यलो सराध : पितरपख को पह्यलो सराध अगस्त मुनी को होस .
* पितरपख म द्वितीया पासिन अस्टमी पावतर को सराध , पितर क मरन क तिथी अनुसार करस . ज्या तिथी होयेन वोनऽ तिथी ला सराध / पूंजा करस .
* नवमी सराध : येनऽ नवमी ला ' मातृ नवमी ' , ' अविधवा नवमी ' कोस . ज्या सवासिन बाई येनऽ दुनिया ला जास , वोनऽ पितर की पूंजा पितरपख म नवमी ला करस .
* दसमी पासिन तेरस पावतर को सराध बी तिथी अनुसार करस.
* चवदस सराध : चवदस क सराध ला ' शस्रदिहत् पितृ श्राध्द ' कोस . जी पितर लढाई म काम आयास , जेनऽ पितर को अकाल स्वर्गवास भयो , वून को सराध चवदस ला करस .
२. अखरपख : पितरपख म अखरपख को खास महत्त्व सऽ . पितरपख को आखरी दिन तेकन , ' अखरपख ' . अखरपख ला च सर्वपितरी अवस कोस . भूल्या - बिसऱ्या तमाम पितर का येनऽ अवस ला सराध करस तेकन ' सर्वपितरी अवस '.
३ . रिवाज : अ ] पितरपख = पितरपख म पूंजा करन साठी दुपारकन् चवरी जवर जेतरा पितर पूंजन का होयेन वोतरा पीठ कन् पितर काढस . वून को मुंडो घर क दरुजा कित आन् पायना घर क अंदर आवता काढस . दिवो , उदबत्ती लगावस . हरद , कुकू , अकसिद वाहस . जेतरा पितरना होयेन , वून क आघऽ वोतरा पात्र ( पत्तल , पतराई ) मांडस . ( या पतराई मोहा कऽ पत्ता की रव्हस . पुरानऽ बखत म कुम्बडा को पान बी धरत होता ). पतराई ला चंदन का पाच बोटना लगावस . दरुजा ला तूप का बोट लगावस . पतराई पर खीर , सवारी , बडा , कढी , भाजी रव्हस . आघऽ निवो धरस आन तूप की धुप देस . पितर क मुंडा म पतराई पर को कागुर धरकन् पानी फिरावस आन् नमस्कार करस . चुल म , चवरी पर आन् तुरसी जवर निवद धरस .
पूंजा भया बाद पीठ कन काढ्यास ती पितर , निवद सावडकन् पतराई पर धरस आन् निवद की पतराई घर क कवल पर धरकन् पानी फिरावस . कागुर खान साठी ' आऽ आऽ ' असा बोलस . पूंजा क निवा ला आंगना म तुरसी जवर धरस आन् तूप की धुप देस . तुरसी जवर उदबत्ती लगायकन् पूंजा करस .
आ ] अखरपख : अखरपख क दिन चवरी जवर क दिवाल जवर पीठ कन् पितर काढस . येनऽ बेरा पितर का पाय दरुजा कित रव्हस , घर क बाहिर जान साठी ! पतराई पर खीर , सवारी , बडा , कढी , भाजी , भज्या रव्हस . पतराई ला चंदन का पाच बोटना लगावस . दिवो , उदबत्ती लगावस . दरुजा ला तूप का बोट लगावस . पितर ला हरद, कुकू , अकसिद वाहस . निवा पर तूप कन् धुप देस . चुल म , दिवरा पर , तुरसी जवर निवद धरस . पितर क मुंडा म निवद धरकन् पानी फिरावस .
सवारी काढन क सराक म सवारी बडो ओयकन् वोला पितर जेनऽ दिवाल सिन काढ्यास , वोनऽ दिवाल म खुपसस . वोकऽ खलतऽ क निवापर , सवारी बडा परीन तूप डावस , जी निवा पर पड्या पाह्यजे . येनऽ पूंजा ला पितर की सिदोरी कव्हस . सबन पाय लागस .
पूंजा भया बाद सारी पूंजा सावडकन् जमा करस . पतराई उठायकन् घर पर धरस आन् पानी फिरावस . ' आऽ आऽ ' आवाज देस . पूंजा को निवो तुरसी जवर धरकन् तूप की धुप देस . हरद कुकू , उदबत्ती लगायकन् तुरसी की पूंजा करस .
* सोरा दिन पितर घर म होता . अखरपख क दुसरऽ दिन सारऽ घर - आंगन मऽ सडो सारवन करस .
* भोयरी संस्कृति मऽ कोनतो बी पर्व , तिवार पितरपख आन् अखरपख सिन मोठो नहाय . पितरपख म आमी सोरा दिन पितर ला याद करकन् पूंजा करजेन . जिन नऽ आमाला या दुनिया दिखाडीस , जलम देयेस , वून क करजा मिन त् आमी मुक्त नही होय सकत , पर साल म येकसाथ सोरा दिन वून ला याद करकन् सरधा - भक्तिभाव कन् , सराध की पूंजा करकन् वून ला नमन जरुर कर सकस .
लेखिका : सौ. पार्वतीबाई महादेवराव देशमुख
लेखन कार्य : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
No comments:
Post a Comment