Wednesday, September 9, 2020

भोयरी संस्कृति - २९ : अखजी bhoyar people _ भोयर लोग bhoyari dialect _ भोयरी बोली

भोयरी संस्कृति - २९ : अखजी

Bhoyar people _ भोयर लोग
Bhoyari culture _ भोयरी संस्कृति

अस्यां तिथौ क्षयमुपैति हुतं न दत्तं , तेनाक्षयेति कथिता मुनिभिस्तृतीया ।
उद्दिश्य दैवतपितॄन्क्रियते मनुष्यै : , तच्चाक्षयं भवति भारत सर्वमेव ।।

Language of the article : bhoyari dialect _ भोयरी बोली 

भोयरी संस्कृति मऽ बैसाख मह्यना क चांदनी ( उजरी ) तीज ला अखजी को तिवार मनावस . अखजी ला अखेजी , आखा तीज , अक्षय तृतीया , अक्षय तीज बी कोस . 
१. इतिहास आन् मान्यता :  * साडेतीन सुभ महुरत म को अखजी येक सुभ महुरत... येक सुभ दिन !
* पुरान कऽ अनुसार अखजी क दिन जी बी सुभ काम करस , दान करस वोको अक्षय फल भेटस असी मान्यता सऽ .
* भविस्य पुरान कऽ अनुसार अखजी की युगादि तिथी म गिनती होस . सतयुग आन् त्रेतायुग की सुरवात अखजी ला च भयीती . द्वापार युग अखजी ला खतम भयेतो . 
* भगवान बिस्नु देव न नर - नारायन , हयग्रीव , परसुराम जी को अवतार अखजी ला च लेयेतो . भगवान बरमा जी को पोरग्यो अक्षयकुमार अखजी ला परगट भयेतो . गंगा माय अखजी क दिन भूलोक म परगट भयीती .
* अखजी ला बद्रीनाथ जी की मूरती मांडस आन् बद्रीनारायन धाम का कपाट उघडस . वृंदावन म बांके बिहारी जी क देऊर म अखजी ला विग्रह को चरन दरसन होस . 
* महाभारत की लढाई अखजी ला खतम भयीती . 
* बुंदेलखंड म अखजी पासिन पुनव पावतर धुमधाम कन् उत्सव मनावस . मालवा म घडा पर आम्बा का पत्ता आन् खरबूज्यो धरकन् पूंजा करस .
* अखजी ला सोनो चांदी खरिदन को चलन सऽ . 
* पुरान कऽ अनुसार पांडव जब बनवास म होता , तब भगवान सिरीकिस्न नऽ वून ला ' अक्षय पात्र ' देयेतो .
* अखजी ला अनपूरना माय की जयंती रव्हस . 
* अखजी क दिन बरसाद - पानी , फसल - पानी को सगुन देखस . 

२ . रिवाज :  भोयरी संस्कृति मऽ अखजी पितर ( कैलासवासी माय - बाप ) को रिन फेडन को दिन मानस . भोयर अखजी पितर ला याद करकन् , भक्तिभाव कन् पूंजा करकन् मनावस . 
* अखजी क पूंजा साठी येक करसो ( माती की घाघर / मडको ) आन् येक कयरी ( नानी घाघर / गाडगो ) पूंजस . करसो दाआजी ( पिताजी ) को प्रतिक त् कयरी ( गाडगो ) माय को प्रतिक मानस .
* अखजी क पह्यलऽ दिन बी तिवार करस , वोला अगनीघास कोस . चूल म , चवरी जवर निवद धरस . निवद साठी सवारी , भज्या , सी ( सेवरी ) , कुरोडी , आमरस करस . 
" अगनी डाये घास , सरग म जाये बास ." 
* अखजी क दिन सवारी ( सुवारी ) , बडा ,  सी ( सेवरी ) , कुरोडी , आमरस , लाडू , करंजी , गोड पापडी , टिखट पापडी करस . 
* चवरी जवर करसो आन् कयरी मांडस . दिवो , उदबत्ती लगावस . करसा आन् कयरी क गरा ला सूत का पाच येढा गुंडकन् चंदन का पाच - पाच बोट लगावस . करसा आन् कयरी म हरारी ( दुर्वा ) , वारो ( वाळा ) , अकसिद डावस . करसा आन् कयरी क आघऽ दुय पतराई / डोना म निवद धरस . पतराई ला चंदन का पाच बोटना लगावस . घाघर क मुंडा पर गोड पापडी आन् करंजी धरस . निवा पर तूप कन् धुप देस . निवद डायकन् पानी फिरावस न् पाय लागस . 

 ३. रिवाज को नेम : * माय को स्वर्गवास भयो होयेन पर दाआजी ( पिताजी ) होयेन त् अखजी ला कयरी ( गाडगो ) नही पूंजता आवत . सिरफ अगनी घास चालस . 
* दाआजी ( पिताजी ) को स्वर्गवास भयो होयेन पर माय होयेन तरी करसो पूंजता आवस . 
* माय बाप को स्वर्गवास भयो होयेन त् गाव म क नवऽ जोडपा ला ( येन साल च ब्याह भये ती लाडा - लाडी ) पितर करस . अखजी क दिन वून ला घर म ल्यावस . पाय पखारस . अकसिद लगावस .  पतराई , करसा - कयरी की पूंजा करस . निवद डावस . पूंजा भया बाद सबन संगच जेवस . जेवन भया बाद येक करसा म करंजी , पापडी , लाडू डायकन् वोला नवऽ पितर ला दान करस . आबऽ तांबा , पितर , चांदी का गडू बी दान करस . 
* पह्यलऽ क जमाना मऽ हर साल अखजी ला पितर करत होता . पितर कम आन् पितर करनी वाला जास्त , तेकन कोन कोनीक्यान पितर बनेन येला गाव का पंच ठह्यरवत होता . 

लेखिका : सौ . पार्वतीबाई महादेवराव देशमुख 
सहयोग / लेखन कार्य : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर 

12 comments:

  1. अखेजी को बारे म पुरी जानकारी दी है भाउ जी आपन बहुत बहुत आभार

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  2. आमाला चांगली माहिती देईस तुमारो खुप खुप अभिनंदन....सुरेश काका 🙏🏻

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    1. धन्यवाद.. असोच प्रेम रव्हन देव...

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  3. अखजी क बाराम् खूप साजरी माहीती दिस् 👌👌

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  4. अखजी सन की खूब साजरी माहिती दीस धन्यवाद.

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