घर कुटुम्ब को धाम
Bhoyar people _ भोयर लोग
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
सुगरन को कोचोडो , दिन रात मह्यनत
सपना क फुलोर ला , आब धरीस गा बात ।धृ।
पेंड पेंड जोडकन् , रची धरी अवकात
पडी मन ला भरांती , समजे नी दिन रात ।१।
जीव फुटे गा घर ला , रोज बाहाडे हात हात
नवो दिन नवो रूप , आयी खुसी की गा घात ।२।
डायी आस की मयाल , खंबा उभा येकजात
सागवान क जोडी ला , भेटी चिचवा की साथ ।३।
कडी बंगई की जोडी , हिलगायी येकसाथ
धाबा पाटन लगायी , घर तसमा को सात ।४।
मास बरस बदल्या , दुनिया की रीत भात
गावगाडा कोठा बाडा , बित्या जमाना की बात ।५।
भयो नवल गयी कवल , बिना वोल बरसात
घर पक्को मन कच्चो , लुके चित् को अकात ।६।
घर कुटुम्ब को धाम , गंगा कासी को तीरथ
सगा सोयरा की माया , पुन्यवान इमारत ।७।
घर भूलोकी सरग , तेज चवरी की जोत
सुख दुख को आसरो , जीव वोको गनगोत ।८।
रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
👌👍💐 खुब साजरी रचना
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