Bhoyari poem _ भोयरी कविता
येक कुसी म का गहू
Bhoyar people _ भोयर लोग
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
भाई बहिन को नातो , केती महिमा मु कहू
येक घर च जलम्या , येक कुसी म का गहू ।धृ.।
पाठ पर बहिन क , पाय देकन गा भाऊ
आये दुनिया म असो , लाड कौतिक को भाऊ ।१।
देखे बाई मुलमुल , बटे जब भात्को खाऊ
वोकऽ हिस्सा ला पस्तुरी , कसो गनित लगाऊ ।२।
नाय सुट्टी बहिन ला , जाय खेलन ला भाऊ
धुनो भांडो झाड झुड , मन वोमच रमाऊ ।३।
मन गंगा माय वानी , वोल हिरदा ला बहू
रहे माया क छाया म , वोक डोरा आघऽ भाऊ ।४।
अडी अडचन बेरा , बाई बनस जिजाऊ
भाई क उन्नती साठी , जसी झिजस खडाऊ ।५।
मन फिफोली क वानी , तन बाई लालबाऊ
धरे सपना गहान , वोकी मुद्दल गा भाऊ ।६।
माय बाप करे चिंता , कब पोटी परनाऊ
फाटे बाई को कलेजो , भाई सिन कसी जाऊ ।७।
बाई लागी संसार ला , बने साह्यब गा भाऊ
भाईदूज पोह्यती ला , नही करत कलेऊ ।८।
पंचारती वोवारस , डोरा पानी देख ऽ आऊ
भाई क सुख साठी , गानो केतरो मु गाऊ ।९।
छाती सिन लगायकन् , रोवस बहिन भाऊ
चोरी बंगडी धरम , निभावस सखो भाऊ ।१०।
रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
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