Tuesday, September 29, 2020

अजब गजब , भाग - ८ : समरांगन सूत्रधार /१. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब , भाग - ८ : समरांगन सूत्रधार - १
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

महान चक्रवर्ती राजा भोज देव न ८४ ग्रंथ लिख्यास . वोमऽ को येक " समरांगण सूत्रधार " . इ भारतीय वास्तुस्यास्तर सिन संबंधित मोठो ग्यान भंडार स . 
* समरांगन सूत्रधार म ८३ अध्याय स आन् ७००० स्लोक ( श्लोक ) स , जेमऽ नगर योजना , भवन - मंदिर निरमान अन् कारागीरी , मूरती कला , मुद्रा संगच यंतर तंतर ( यंत्र विद्या ) को अचंबो करनी लाइक ग्यान स .
* अध्याय ३१ को नाव स ,' यंत्र विधान ' . येनऽ अध्याय म कयी यंतर तंतर को वरनन स . लकडी को विमान , यांत्रिक दरबान अन् सिपाई , संगच रोबोट की झलक बी देखन ला भेटस .
१. यंत्र क्रिया : विमान विद्या - यंत्र विधान म कयी स्लोक ( श्लोक ) विमान क बारा म स . 
_ लघुदारुमयं महाविहंगं दृढसुश्लिष्ट तनुं विधाय तस्य ।
उदरे रसयन्त्रमादधीत ज्वलनाधारमधोऽस्य चातिपूर्णम ।। ९५
_ तत्रारूढ पूरुषस्तस्य पक्षद्वन्द्वोच्चाप्रोज्झितेनानिलेन ।
सुप्तस्वान्त: पारदस्यास्य शक्ता चित्रं कुर्वन्नम्बरे याति दूरम ।। ९६
_ अय: कपालहितमन्दवव्हिप्रतप्ततत्कुम्भभुवा गुणेन ।
व्योम्नो झगित्याभरणत्वमेति सन्तप्तगर्जद्ररसरागशक्त्या ।।९७
२ . यंतर की क्रिया : * कोनती मसीन ( यंतर ) येकच क्रिया घडी घडी करत रव्हस .
* कोनती मसीन घडी घडी नी त् विसेस बेरा पर आपलो खास काम करस .
* कोनती मसीन आवाज करन साठी नी त् आवाज को संचालन / बदलाव साठी रव्हस .
* कोनती मसीन वस्तु को आकार नानो - मोठो करन साठी , आकार बदलवन साठी , धार लगावन साठी रव्हस .
३ . मसीन ( यंतर ) का गुन : * बखत बखत पर खुद ला चलावन साठी मसीन मिन बल ( शक्ति ) निरमान होत रव्हन ला पाह्यजेन . 
* मसीन क हरेक काम म संतुलन आन् सहकार रह्या पायजेन.
* मसीन आरामकन् , बिना आवाज कन् चली पायजे.
* मसीन ला घडी घडी वोरायलिंग की गरज नी पड्या पाह्यजे .
* मसीन अटक अटक कन् नी चल्या पायजे.
* मसीन क काम म जास्त दबाव पड्या पाह्यजे .
* मसीन मिन सावधानी वाली आवाज निकरी पायजे .
* मसीन ढीली आन् थरथरी ( कापी ) नी पायजे .
* मसीन येकदम बंद बी नी भया पायजेन .
* जेनऽ काम साठी मसीन बनाईस , वू काम भये पायजे .
* मसीन याटोम्याटिक रही पायजे .
* मसीन म ताकद रही पायजे .
* मसीन को काम सीधो आन् चलावन ला सोपी रही पायजे .
* मसीन जास्त दिन चल्या पायजे .
४ . मसीन ( यंतर ) की गति : 
तिर्यगूर्ध्वंमध: पृष्ठे पुरत: पार्श्वयोरपि ।
गमनं सरणं पात इति भेदा: क्रियोद्भवा ।। अध्याय ३१
मतलब मसीन टेढी , वरतऽ , खलतऽ , पासऽ , आघऽ , बाजू म चली पायजे .
५ . पानी पर चलनी वाली मसीन : 
धारा च जलभारश्च पयसो भ्रमणं तथा ।
यथोच्र्छायो यथाधिक्यं यथा नीरंध्रतापि च ।
एवमादीनि भूजस्य जलजानी प्रचक्षते ।। अध्याय ३१
बह्यतऽ पानी को भार आन् जोर बापरकन् ताकद ( शक्ति ) बनावन साठी टरबाईन को बापर करस . पानी की जोर की धार वस्तु ला घुमावस. धार जेतरऽ उचाई परिन पडेन वोतरी वोकी ताकद जास्त रव्हस .
६. यंतर मानव ( रोबोट ) : 
_ अथ दासादि परिजनवर्गेर्विना तत्कृत्याना सर्वेशा ।
यथावन्निर्वहणाय कल्पितस्य स्त्रीपुरुषप्रतिमायन्त्र घटना ।। 
_ मतलब घर म नवकर - चाकर , परिजन नी रह्या पर घर को काम बाई / मानुस क रूप वालो रोबोट करस .
_ दृगग्रीवातलहस्तप्रकोष्ठबाहूरुहस्तशाखादि ।
सच्छिद्र वपुरखिल तत्साधिंषु खंडशो घटयेत ।। अध्याय ३१ / श्लोक १०१ 
येनऽ रोबोट ला डोरा , गरदन , तरहात , खांदो , हात , छाती , उंगल बी रव्हन ला पाह्यजेन . जरुरत होयेन वहान सेदूर करकन् आंग क पुरजाना ला , भाग ला जोडकन् घडाई करी पायजे .
_ शिलिष्ट कीलकविधिना दारुमय सृष्टचर्मणा गुप्तं ।
पुंसोऽथवा युवक्त्या रूपं कृत्वातिरमणीयम् ।
रन्ध्रगते: प्रत्यंग विधिना नाराचसगते: सूत्रे: ।। अध्याय ३१ / श्लोक १०२
जोड जंतर साठी जी खिराना बापऱ्यास ती चिकना आन् बराबर लगाया पायजेन . रोबोट त् लकडी को रहेन पर वोपर चमढो मढकन् वोला बाई / मानुस को रूप देनो ; आन् यी रूप खूब साजरो रह्या पायजेन . रोबोट को ढांचो बनन क बाद वोकऽ सेदूरना मिन वोकऽ हालचाल साठी जुगाड कऱ्या पायजे . 
_ ग्रीवाचलनप्रसरणविकुज्चनादीनि विदधाति ।
करग्रहणाताम्बुलप्रदानजलसेचनप्रणामादि ।। अध्याय ३१ / श्लोक १०३
रोबोट की गरदन घुमी पायजे , हात फयलता - जमा करता आया पायजे , पानसुपारी देता आयी पायजे , पानी वोलन ला आये पायजे आन् राम राम बी कऱ्या पायजे .
_ आदर्श प्रतिलोकनविणवाद्यादि च करोति ।
एवमन्यद्पि चेद्दशमेतत कर्म विस्मयविधायि विधत्ते ।
जृम्भितेन विधिना निजबुध्दे:कृष्टमुक्तगुणचक्रवशेन ।। अध्याय ३१ / श्लोक १०४-१०५
रोबोट आवनीवाला ला आयनो दिखाडस , वीना सरखा साज बजावस . रोबोट यी यंतर मानव सारो काम पुरो करस . चक्रीय विधि क अनुसार , संचालक क बुध्दी नुसार रोबोट काम करन ला लागस .

* दरबान रोबोट : 
_  पुंसो दारुजमुर्ध्व रुपंकृत्वा निकेतनद्वारि ।
तत्करयोजित दंड निरुणद्घि प्रविशता वर्म्त ।। अध्याय ३१ / श्लोक १०६ 
डंडो लियो दरबान रोबोट बिना अनुमती कन् घर मऽ घुसनी वाला ला थांबाडेन .
_ खड्गहस्तमथ मुद्ररहस्त कुंतहस्तमथवा यदितत् स्यात ।
तन्निहन्ति विशतो निशि चौरान द्वारि संवृतमुख प्रभसेन ।। अध्याय ३१ / श्लोक १०७ 
रोबोट दरबान क हात म तलवार , मोगरी , भालो - बरछी दे त् वू रात म आवनी वालऽ चोर चोट्टा आन् मुंडो झाककन् घुसनीवाला ला मार सकस ........... ( क्रमशः )
( साभार : समरांगण सूत्रधार - राजा भोज देव जी )

लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर 


7 comments:

  1. अपनी बोली भाषा में अनुवाद बहुत बढ़िया शानदार भैय्या जी

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  2. खुप सुंदर सविस्तर माहीती ।।एतिहासिक धरोवर ।।वा
    समरांगन सुञधार ।।

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