अजब गजब , भाग - ८ : समरांगन सूत्रधार - १
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
महान चक्रवर्ती राजा भोज देव न ८४ ग्रंथ लिख्यास . वोमऽ को येक " समरांगण सूत्रधार " . इ भारतीय वास्तुस्यास्तर सिन संबंधित मोठो ग्यान भंडार स .
* समरांगन सूत्रधार म ८३ अध्याय स आन् ७००० स्लोक ( श्लोक ) स , जेमऽ नगर योजना , भवन - मंदिर निरमान अन् कारागीरी , मूरती कला , मुद्रा संगच यंतर तंतर ( यंत्र विद्या ) को अचंबो करनी लाइक ग्यान स .
* अध्याय ३१ को नाव स ,' यंत्र विधान ' . येनऽ अध्याय म कयी यंतर तंतर को वरनन स . लकडी को विमान , यांत्रिक दरबान अन् सिपाई , संगच रोबोट की झलक बी देखन ला भेटस .
१. यंत्र क्रिया : विमान विद्या - यंत्र विधान म कयी स्लोक ( श्लोक ) विमान क बारा म स .
_ लघुदारुमयं महाविहंगं दृढसुश्लिष्ट तनुं विधाय तस्य ।
उदरे रसयन्त्रमादधीत ज्वलनाधारमधोऽस्य चातिपूर्णम ।। ९५
_ तत्रारूढ पूरुषस्तस्य पक्षद्वन्द्वोच्चाप्रोज्झितेनानिलेन ।
सुप्तस्वान्त: पारदस्यास्य शक्ता चित्रं कुर्वन्नम्बरे याति दूरम ।। ९६
_ अय: कपालहितमन्दवव्हिप्रतप्ततत्कुम्भभुवा गुणेन ।
व्योम्नो झगित्याभरणत्वमेति सन्तप्तगर्जद्ररसरागशक्त्या ।।९७
२ . यंतर की क्रिया : * कोनती मसीन ( यंतर ) येकच क्रिया घडी घडी करत रव्हस .
* कोनती मसीन घडी घडी नी त् विसेस बेरा पर आपलो खास काम करस .
* कोनती मसीन आवाज करन साठी नी त् आवाज को संचालन / बदलाव साठी रव्हस .
* कोनती मसीन वस्तु को आकार नानो - मोठो करन साठी , आकार बदलवन साठी , धार लगावन साठी रव्हस .
३ . मसीन ( यंतर ) का गुन : * बखत बखत पर खुद ला चलावन साठी मसीन मिन बल ( शक्ति ) निरमान होत रव्हन ला पाह्यजेन .
* मसीन क हरेक काम म संतुलन आन् सहकार रह्या पायजेन.
* मसीन आरामकन् , बिना आवाज कन् चली पायजे.
* मसीन ला घडी घडी वोरायलिंग की गरज नी पड्या पाह्यजे .
* मसीन अटक अटक कन् नी चल्या पायजे.
* मसीन क काम म जास्त दबाव पड्या पाह्यजे .
* मसीन मिन सावधानी वाली आवाज निकरी पायजे .
* मसीन ढीली आन् थरथरी ( कापी ) नी पायजे .
* मसीन येकदम बंद बी नी भया पायजेन .
* जेनऽ काम साठी मसीन बनाईस , वू काम भये पायजे .
* मसीन याटोम्याटिक रही पायजे .
* मसीन म ताकद रही पायजे .
* मसीन को काम सीधो आन् चलावन ला सोपी रही पायजे .
* मसीन जास्त दिन चल्या पायजे .
४ . मसीन ( यंतर ) की गति :
तिर्यगूर्ध्वंमध: पृष्ठे पुरत: पार्श्वयोरपि ।
गमनं सरणं पात इति भेदा: क्रियोद्भवा ।। अध्याय ३१
मतलब मसीन टेढी , वरतऽ , खलतऽ , पासऽ , आघऽ , बाजू म चली पायजे .
५ . पानी पर चलनी वाली मसीन :
धारा च जलभारश्च पयसो भ्रमणं तथा ।
यथोच्र्छायो यथाधिक्यं यथा नीरंध्रतापि च ।
एवमादीनि भूजस्य जलजानी प्रचक्षते ।। अध्याय ३१
बह्यतऽ पानी को भार आन् जोर बापरकन् ताकद ( शक्ति ) बनावन साठी टरबाईन को बापर करस . पानी की जोर की धार वस्तु ला घुमावस. धार जेतरऽ उचाई परिन पडेन वोतरी वोकी ताकद जास्त रव्हस .
६. यंतर मानव ( रोबोट ) :
_ अथ दासादि परिजनवर्गेर्विना तत्कृत्याना सर्वेशा ।
यथावन्निर्वहणाय कल्पितस्य स्त्रीपुरुषप्रतिमायन्त्र घटना ।।
_ मतलब घर म नवकर - चाकर , परिजन नी रह्या पर घर को काम बाई / मानुस क रूप वालो रोबोट करस .
_ दृगग्रीवातलहस्तप्रकोष्ठबाहूरुहस्तशाखादि ।
सच्छिद्र वपुरखिल तत्साधिंषु खंडशो घटयेत ।। अध्याय ३१ / श्लोक १०१
येनऽ रोबोट ला डोरा , गरदन , तरहात , खांदो , हात , छाती , उंगल बी रव्हन ला पाह्यजेन . जरुरत होयेन वहान सेदूर करकन् आंग क पुरजाना ला , भाग ला जोडकन् घडाई करी पायजे .
_ शिलिष्ट कीलकविधिना दारुमय सृष्टचर्मणा गुप्तं ।
पुंसोऽथवा युवक्त्या रूपं कृत्वातिरमणीयम् ।
रन्ध्रगते: प्रत्यंग विधिना नाराचसगते: सूत्रे: ।। अध्याय ३१ / श्लोक १०२
जोड जंतर साठी जी खिराना बापऱ्यास ती चिकना आन् बराबर लगाया पायजेन . रोबोट त् लकडी को रहेन पर वोपर चमढो मढकन् वोला बाई / मानुस को रूप देनो ; आन् यी रूप खूब साजरो रह्या पायजेन . रोबोट को ढांचो बनन क बाद वोकऽ सेदूरना मिन वोकऽ हालचाल साठी जुगाड कऱ्या पायजे .
_ ग्रीवाचलनप्रसरणविकुज्चनादीनि विदधाति ।
करग्रहणाताम्बुलप्रदानजलसेचनप्रणामादि ।। अध्याय ३१ / श्लोक १०३
रोबोट की गरदन घुमी पायजे , हात फयलता - जमा करता आया पायजे , पानसुपारी देता आयी पायजे , पानी वोलन ला आये पायजे आन् राम राम बी कऱ्या पायजे .
_ आदर्श प्रतिलोकनविणवाद्यादि च करोति ।
एवमन्यद्पि चेद्दशमेतत कर्म विस्मयविधायि विधत्ते ।
जृम्भितेन विधिना निजबुध्दे:कृष्टमुक्तगुणचक्रवशेन ।। अध्याय ३१ / श्लोक १०४-१०५
रोबोट आवनीवाला ला आयनो दिखाडस , वीना सरखा साज बजावस . रोबोट यी यंतर मानव सारो काम पुरो करस . चक्रीय विधि क अनुसार , संचालक क बुध्दी नुसार रोबोट काम करन ला लागस .
* दरबान रोबोट :
_ पुंसो दारुजमुर्ध्व रुपंकृत्वा निकेतनद्वारि ।
तत्करयोजित दंड निरुणद्घि प्रविशता वर्म्त ।। अध्याय ३१ / श्लोक १०६
डंडो लियो दरबान रोबोट बिना अनुमती कन् घर मऽ घुसनी वाला ला थांबाडेन .
_ खड्गहस्तमथ मुद्ररहस्त कुंतहस्तमथवा यदितत् स्यात ।
तन्निहन्ति विशतो निशि चौरान द्वारि संवृतमुख प्रभसेन ।। अध्याय ३१ / श्लोक १०७
रोबोट दरबान क हात म तलवार , मोगरी , भालो - बरछी दे त् वू रात म आवनी वालऽ चोर चोट्टा आन् मुंडो झाककन् घुसनीवाला ला मार सकस ........... ( क्रमशः )
( साभार : समरांगण सूत्रधार - राजा भोज देव जी )
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
अपनी बोली भाषा में अनुवाद बहुत बढ़िया शानदार भैय्या जी
ReplyDeleteधन्यवाद जी
Deleteधन्यवाद सर
ReplyDeleteखुप सुंदर सविस्तर माहीती ।।एतिहासिक धरोवर ।।वा
ReplyDeleteसमरांगन सुञधार ।।
खुप साजरी
ReplyDeleteखुप साजरी
ReplyDeleteखुप साजरी
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