भोयर अन् नदी माय - २ : वर्धा नदी
भोयरी संस्कृति ला वर्धा नदी ' वरदायिनी ' स . मध्यप्रदेस क बैतूल जिला की मुलताई तहसील क वरधन सिखर ( वर्धन शिखर ) परीन वर्धा नदी को उगम होस . मुलताई जवर को खैरवानी गाव , वर्धा नदी को जलम गाव . भोयरी संस्कृति मऽ वर्धा नदी ला खास महत्त्व सऽ .
इरयी , वेना , पोथरा , बेंबळा , निरगुडा , जाम , कार इ वर्धा नदी की मुख्य उपनदीना स .
१. इतिहास : * वसिस्ठ पुरान मऽ वर्धा नदी को नाव ' वरदा ' स , आन् वसिस्ठ रिसी न वर्धा जवर क केळझर म ' वरद विनायक ' की स्थापना करीस .
* वर्धा नदी ' वराह ' क मुंडा मिन निकरीस . वराह भगवान बिस्नूदेव को अवतार ! वर्धा नदी को पह्यलो नाव ' वराह ' . आसिरवाद देनीवाली वरदायिनी , तेकन दुसरो नाव वरदा . आबऽ आमी कव्हजे वर्धा माय .
* पूर्व इतिहास काल म विदर्भराज ' यज्ञसेन ' संगऽ वोको चुलत भाई माधवसेन आन् माधवसेन को सोबती ' अग्निमित्र ' क फऊज की लढाई भयी . येनऽ लढाई म विदर्भराज यज्ञसेन हाऱ्यो आन् वोला समझोतो करनो पड्यो . तब पासीन वरदा नदी विदर्भ राज की विभाजक सीमा बनी .
* ' ऐन - इ - अकबरी ' म वरदा नदी को उगम ताप्ती माय क उगम पासीन १० कुरो दूर स , असो उल्लेख स .
* इंग्रज क जमाना मऽ इ. स. १८६२ ला ' वर्धा ' जिलो बन्यो . येन जिला की उत्तर , पश्चिम , दकसिन हद वर्धा नदी कन् बनी आन् वर्धा नदी क नाव परीन नाव देयो ' वर्धा जिला ' . तब जिला की कचेरी पुलगाव जवर कवठा गाव म होती . इ. स. १८६६ ला पालकवाडी गाव म कचेरी लायी आन् नवो वर्धा स्यहर बसाडे . तब पासिन वर्धा जिला की कचेरी वर्धा म स .
२ . संस्कृति : आर्वी पासिन जवर च वर्धा नदी पर विदर्भ की पुरानी राजधानी " कौंडण्यपूर " स. कौंडन्यपूर ला च कुन्डिनपूर , कुंडिनी , कुंडलपूर , विदर्भ , विदर्भा बी नाव स . यहान महापास्यान जुग पासिन ( ४००० बरस पासिन ) साहा संस्कृतीना नांदीस . पह्यली ४००० बरस पासिन , दुसरी २८०० बरस पासिन , तीसरी २३०० बरस पासिन , चवथी सातवाहन काल , पाचवी वाकाटक - राष्ट्रकुट काल , साहाव्वी मध्ययुगीन काल पासिन !
* भगवान सिरी राम की बय इंदुमती ( राजा दसरथ को दाआजी ' राजा अज ' की रानी ) , अगस्ती रिसी की लाडी लोपामुद्रा , भगवान सिरी किस्न देव की बय पद्मावती ( माय की माय ) , नल राजा की रानी दमयंती आन् गंगा माय ला भूलोक पर ल्यावनी वालो राजा भगिरथ की माय ' केशनी ' कौंडन्यपूर की च !
* आन् सबन ला च ठाव स वा भगवान सिरी किस्न देव की रानी रुखमनी माय बी यहान की च !!!!
* भगवान राम किस्न सिन वरदा माय को असो साजरो नातो . वर्धा माय क पोटीना न इतिहास घडाये... संस्कृति की रचना करी !!!!!!!!!
३ . उत्सव : * वर्धा नदी को उद्गम ठिकान मुलताई पासिन ११ कि.मी. पर खैरवानी गाव जवर स . यहान कपिल मुनी न तप करेतो , असी मान्यता सऽ . राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी यहान आयाता . भूदान आंदोलन क बेरा विनोबा भावे जी बी यहान आयाता . यहान नानोसो कुंड आन् घाट स . घाट पर भगवान सिवजी आन् वर्धा माय को देऊर स . मकर संगरात् ला यहान तीन दिन की यातरा भरस . आन् ' गायत्री महायज्ञ ' बी होस .
* देवळी जवर रोहनी ( राव ) गाव स . यहान को कोटेस्वर सिवमंदिर मनजे कासी च ! वर्धा माय यहान महादेव मुखी होयकन् देऊर ला येढो मारस . वसिस्ठ रिसी न यहान येक कोटी आहुती होम कऱ्यास , तेकन इ नाव पड्यो , असी मान्यता सऽ . नदी क वोन काठ खटेस्वर मंदिर स . महासिवरातरी ला यहान मोठी यातरा भरस .
* चंद्रपूर जिला म घुग्गुस जवर क ' वढा ' तीरथ ला इठ्ठल रखुमाई को परसिध्द देऊर स . वढा ला वर्धा , पैनगंगा आन् निरगुडा नदी को ' त्रिवेणी संगम ' स . नदी क दुसरऽ थडी पर जुगाद गाव म भगवान महादेव को पुरानो देऊर स . कारतिक पुनव येन संगम पर तीन दिन की यातरा भरस .
* वर्धा नदी क काठ पर खांडक्या बल्लालस्या राजा न बल्लारस्या ( बल्लारपूर ) नगर बसाडकन् किल्लो ( गढ ) बांध्ये . यहान मारखंड रिसी आन् महामाया को देऊर स .
* बल्लारपूर क आघऽ वर्धा नदी पर राजुरा इ तहसील को ठिकान स . ११ वी स्यताब्दी म यहान परमार राज होतो . वोनऽ बेरा को ' सोमेस्वर मंदिर ' राजुरा आन् आपली बी स्यान स . यहान बी महासिवरातरी ला यातरा भरस .
# राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी न साबरमती माय पासिन देस सेवा की सुरवात करी ..बाद म वर्धा माय क जवर सेवाग्राम ला आपलो ठिकानो बनायकन् वोला दुनिया म मान देयो .
# वर्धा माय क कोरा म भोयरी संस्कृति ला आसरो भेट्यो . वोक ऽ सुपिक माती मऽ जवारी , गहू , कापूस , संतरा क फसलकन् भोयर समाज सधन भयो . वर्धा माय न भोयर समाज ला आसरो देकन पाले , पोसे च नी त् खूब बाहाडाये बी !
" तोरी महिमा अपार वरदा माय , तोरी किरपा अपरंपार ."
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर .
That's rarest part I heard of. Thank you.
ReplyDeleteWelcome sir
Deleteआपल्या समाजाला वरदान असलेल्या वर्धा नदिचे महत्व पटवून देणारा खुपच छान लेख आहे..........
ReplyDeleteधन्यवाद निलेश दा
DeleteDeshmukh ji aapka sadprayas aur sadsahitya aane wali pidhi ke liye dharohar sabit hoga.
ReplyDeleteBhagwan aapko sadaiv swasth sukhi sampann aur dirghayu banaaye rakhe.
आपकी शुभकामनाए , आशिष एवं मार्गदर्शन के लिये धन्यवाद सर...
Deleteवर्धा नदी ।।।। सविस्तर वर्णन
ReplyDeleteवर्धा माई की खूब साजरी माहिती.
ReplyDeleteलय साजरी
ReplyDeleteलय साजरी
ReplyDelete