अजब गजब - ७९ : हीरई माता
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
नमो देव्यै प्रकृत्यै च विधात्र्यै सततं नमः ।
कल्याणै कामदायै च वृध्दयै सिध्दयै नमो नमः ।।
मध्यप्रदेस क खरगोन जिला म भीकनगांव पासीन सनावद सडक प २५ कि.मी. दूर हीरापुर स . यहान मन्नत पूरी करनी वाली कुलदेवी ' हीरई माता ' को देऊर स .
देऊर म हीरई माता अन् भगवान शिवजी की थापना स .
हिरई माता क नाव परीन च यहान बसे गाव ला ' हीरापुर ' इ नाव पड्यो . येन हजार बरस पुरानऽ देऊर को आवार खूब मोठो स . हिरई माय क देऊर म चवसठ योगिनि को बास स . आवार म भगवान गनेस, बिस्नु देव , दुरगा माय , हनुमान जी , लक्षुमी नारायन असी कयी मूरतीना स . इ देऊर पुरातत्त्व विभाग क अखत्यारी म स . सार आवार म परमार कार की दुरलभ मूरतीना स .
हीरापुर क इलाखा म अंबा , बेडिया , भूलगांव , बांगरदा , बांसवा , कोटल्याखेडी , धरगांव , मालखेडा , नूरीयाखेडी म आब बी पंवार वंस क लोगना की बस्ती स . येन निमाड क इलाखा पर पंवार वंस न राज करेस .
१. इतिहास अन् मान्यता : * यहान का पंवार सांगस क वूई माऊंट अबू परीन धार आया . वहान महाकाली देऊर जवर भयरव जी की थापना करी . वहा सिन अमझेरा आया . अमझेरा म अमका - झुमका माता को देऊर आन् बावडी बांधी . ११ वी / १२ वी सदी म अमझेरा सिन हीरापुर आया . यहान कुलदेवी हीरई माता को देऊर बांध्ये आन् हीरापुर गाव बसाडे .
* नि:संतान की मनोकामना हीरई माता पूरी करस , असी मान्यता स .
* येन इलाखा का पंवार हीरई माता की कुलदेवी क रूप म पूंजा करस .
* इ.स. १९७२ म यहान की परमार कार की दुरलभ ४ मूरतीना की चोरी भयी . ( येम भगवान भोलेनाथ क कोरा म बसी पाराबती अन् दूध पेता भगवान गनेस की अति दुरलभ मूरतीना बी सामिल स .)
२. पूजा / पर्व : * उसो त साल भर भगत लोगना को यहान आनो जानो चालूच रव्हस . पर नवरातरी म हीरई माता की खास पूंजापाती आन् अनुस्ठान होस .
' जय हो हीरई माय '
( सहयोग : इंजि. जालमसिंह सोढा जी जोधपुर )
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
जय हो माई
ReplyDeleteधन्यवाद नन्दलाल जी 🙏🙏
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