Friday, September 18, 2020

भोयर अन् नदी माय - ३: नरबदा नदी. bhoyar people _ भोयर लोग

भोयर अन् नदी माय - ३ : नरबदा नदी

Bhoyar people _ भोयर लोग
Language of the article : bhoyari dialect _ भोयरी बोली

पुण्या कनखले गंगा कुरुक्षेत्रे सरस्वती ।
ग्रामेवा यदि वारण्ये पुण्या सर्वत्र नर्मदा ।
त्रिभि: सारस्वतं पुण्यं सप्ताहेनतुयामुनम् ।
सद्य:पुनातिगान्गेयंदर्शनादेवनर्मदाम् ।।

भोयरी संस्कृति मऽ नरबदा माय को मोठो मान आन् स्थान स . नरबदा माय न भोयरी संस्कृति बाचाडी... वोला आसरो देयो . भोयरी संस्कृति की नरबदा माय जीवन रेखा स . उत्तर आन् दकसिन भारत की नरमदा माय पारंपारिक हद ! माय नरबदा येतरी बुजरूक स क गंगा माय की उमर बी वोक आघ लय कम ! नरबदा माय को वाहन स मगर .

१ . इतिहास आन् मान्यता :  * माय नरबदा जेको नाव ' रेवा ' बी स , मयखल राजा की पोटी . अमरकंटक क पहाडी पर वोको जलम भयो . वून क घर जवरच ' सोनभद्र ' नद को बी घर होतो . नानपन दुय झना संगसंगच खेल्या . मोठा भया पर येक मेक क संगच रव्हन की बात भयी . पर ' सोनभद्र ' को मन ' जुहिला ' पर आयो . जुहिला नरबदा की सखी होती . नाराज होयकन् नरबदा दुसरी दिस्या म गयी आन् कुवारी रव्हन की कसम खायी  ; असी कथा स . दुसरऽ कथा म ' गुलबकावली ' को फुल ल्यावन को ' पन स . 
* भगवान सिवजी अंधकासुर राकस को वध करकन् मेकल परबत पर ( अमरकंटक ) समाधी म बस्याता . भगवान बरमा जी , भगवान बिस्नूदेव जी अमरकंटक ला आया आन् भगवान महादेव ला कह्ये क् आमारऽ पाप निवारन साठी उपाव सांगो . तब भगवान महादेव क कपार मिसिन जोत निकरी आन् जमीन पर पडी . वोन जोत मिसिन माय नरबदा परगट भयी , वू दिन होतो माघ मह्यना की चांदनी ( उजरी ) सपतमी , माय नरबदा को जलमदिन ! 
* पुरी दुनिया म सिरफ माय नरबदा च असी नदी स , जेकी परिकरमा करस .
* पुरान कऽ अनुसार नरबदा की नहर सोमवंसी राजा न बनाइती . तेकन नाव पड्यो , ' सोमोद्भवा '. 
* कालिदास न वोला ' सोमप्रभवा ' कह्येस . आन् मेघदूत म माय नरबदा को खूब साजरो वरनन करेस .
* पुरान कऽ अनुसार गंगा नहान कन् जी पून्य भेटस , वू माय नरबदा क सिरफ दरस्यन कन् भेटस . 
* नरबदा माय की महिमा वेदव्यास जी न स्कन्द पुरान क ' रेवाखंड ' म सांगीस . भगवान महादेव क किरपा कन् माय नरबदा १२ बरस क पोटी क रूप मऽ परगट भयीती . महारूपवती होन क कारन भगवान बिस्नूदेव आन् दुसरऽ देवताना न नामकरन कऱ्यो , 
" नर्मदा " . 
* माय नरबदा ला भेट्यास ती वरदान -- परलय म वोको नास नी होयेन , येकली च पाप - नासिनी क रूप म परसिध्द होयेन ( येकी मियाद आब खतम भयी , असो मानस .) , वोको हर कंकड ( नर्मदेश्वर ) सिवलिंग क रूप म पूंज्या जायेन , सिव - पाराबती संगच सबन देवताना वोक ऽ ठड्डी पर निवास करेन .
* सबन देवता , रिसी मुनी , गनेस जी , कारतिकेय जी , भगवान सिरी राम , लक्षुमन , हनुमान जी न नरबदा क काठ पर जप तप करकन् सिध्दी पाईस .
* अग्निपुरान , मत्स्य पुरान , पद्म पुरान , कूर्म पुरान मऽ नरबदा माय की महिमा स .

२. तीरथ :   * नरबदा माय पर १० करोड तीरथ स !
* अमरकंटक - मध्यप्रदेस म को अमरकंटक नरबदा माय को उगम स्थल . यासीन नरबदा , सोन आन् जुहिला नदी को उगम होस . अमरकंटक ला विंध्य आन् सतपुडा को मेल होस . यहान मेकल , व्यास , भृगू , कपिल रिसी मुनी न तपस्या करीस . अमरकंटक म तीन दिन ' नर्मदा जयंती उत्सव ' चलस .
* मंडला - मंडला म नरबदा - बंजर घाट पर हरसाल कारतिक पुनव ला मोठो मेलो लागस .सरावन मह्यना म बी नरबदा घाट पर धारमिक आयोजन रव्हस . 
* भेडाघाट जबलपूर --  भृगू रिसी की तप स्थली होन क कारन भेडाघाट आन् जाबालि रिसी क नाव परीन जबलपूर इ नाव पड्यो . यहान चवसठ योगिनी मंदिर , ग्वारीघाट , तिलवार घाट , लमेहटा घाट , पंचवटी घाट स . यहान नवरातरी , महासिवरातरी ला मेलो लागस .
* होसंगाबाद / नर्मदापुरम -- यहान आखाडी , गुढीपाडवो , नवरातरी , महासिवरातरी , नर्मदा जयंती महोत्सव पर्व धुमधाम कन् मनावस .
* नेमावर -- यहान सिध्देश्वर महादेव को पुरानो देऊर स . नरबदा परिकरमा को येला ' नाभिस्थान ' कव्हस . येन जागा ला पुरान मऽ ' रेवाखंड ' कह्येस . 
* धायडी कुंड -- या असी जागा स , ज्यासिन पुरऽ देस म सिवलिंगना लिजास .
* ओंकारेश्वर -- यहान नरबदा माय न ॐ क आकार को टापू बनायेस . इ जोतिरलिंग को पावन तीरथ स . यहान अहिल्याबाई को बनायो ममलेस्वर ( अमलेस्वर ) जोतिरलिंग बी स . महान देव भगत अम्बरिस आन् मुचकुंद को दाआजी सूर्व्यवंसी राजा मान्धाता न यहान सिवजी को कठोर तप करकन् सिवजी ला परसन्न कऱ्योतो . वून क नाव पर च येनऽ परबत ला मान्धाता कव्हस . यहान अखरपख , महासिवरातरी , आखाडी , नर्मदा जयंती उत्सव ला भगतना को मोठो मेलो भरस .
* महेश्वर -- यहान सिव मंदिर , महेस्वरी माता मंदिर , अहिल्याबाई मंदिर स . यहान महासिवरातरी , नवरातरी , नर्मदा जयंती उत्सव ला मेलो भरस . 
* कोटेश्वर -- नरबदा क उत्तर थडी पर कोटेस्वर महादेव मंदिर स . यहान कस्यप रुसी आसरम , करजेस्वर ( कस्यप रुसी को पोरग्यो ) आसरम , च्यवन रुसी को आसरम  आन् परसिध्द जयंती माता मंदिर स . यहान नर्मदा जयंती उत्सव , महासिवरातरी आन् नवरातरी ला मेलो लागस .
* डिंडोरी / रामगढ -- यहान हरसाल नर्मदा जयंती उत्सव धुमधाम कन् मनावस .
* मांडवगड - चक्रवर्ती राजा भोज आन् परमार वंस की राजधानी त् विंध्य परबत पर स , पर यहान क ' रेवाकुंड ' ला माय नरबदा को च हिस्सो मानस . नरबदा परिकरमा भया पर भगत लोग  ' रेवाकुंड ' ला आवस ; तब च वून की नरबदा परिकरमा पुरी होस , असी मान्यता सऽ .
* भडूच - भडूच म माय नरबदा समुंदर ला भेटस . भडूच ला ' भृगू तीरथ ' बी कव्हस . बलि राजा न यहान अस्वमेध होम कऱ्योतो . 
# नरबदा माय की हर जागा तीरथ स .. वोको हर कंकर , स्यंकर स..
करोडो तीरथ की जानकारी येक किताब म नी मायेन...
माय नरबदा म आपला जनेऊ सिरायकन् भोयर वंस न वोला वलांडे... माय नरबदा न भोयरी संस्कृति बाचाडी आन् बाहाडायी बी.. भोयरी संस्कृति पर नरबदा माय का लय उपकार स...
हर हर हर हर नमामि देवी नर्मदे....

लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

10 comments:

  1. खूब साजरी माहिती.

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  2. खुप खुप सुंदर सादरीकरण..👌👌

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  3. खुप खुप सुंदर सादरीकरण..👌👌

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  4. जय मां नर्मदा
    त्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे

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  5. जय हो मां नर्मदा की त्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे हर हर नर्मदे

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