भोयर अन् नदी माय - ४ : सिपरा
Bhoyar people _ भोयर लोग
महाकाल श्री शिप्रा गतिश्चैव सुनिर्मला ।
उज्जयिन्यां विशालाक्षि वास: कस्य न रोचते ।।
स्नानं कृत्वा नरो यस्तु महान घाम हि दुर्लभम् ।
महाकालं नमस्कृत्य नरो मृत्युं न शोचते ।।
-- महरसी वसिस्ठ
Language of the article : bhoyari dialect _ भोयरी बोली
सिव की नगरी उज्जयनी , जोतिरलिंग महाकाल आन् नदी माय सिपरा भोयर संस्कृति को मानबिंदू स . सिपरा माय अनंत काल पासिन महाकाल ला अभिसेक कर रहीस . सिपरा माय को उगम इंदौर जवर क उज्जैनी मुंडला गाव क ककडी बडली स्थान / महू छावनी पासिन १७ कि.मी. पर जानापाव पहाडी जवर स . जानापाव पहाडी भगवान परसुराम जी को जलमस्थान !
* सिपरा नदी ला शिपरा , शिप्रा , क्षिप्रा , सोमवती , लोकसरिता नाव बी स .
१ . कुंभ मेलो : दुनिया म को सबसिन मोठो धारमिक आयोजन मनजे ' कुंभमेलो ' . कुंभमेला को आयोजन सनातन काल पासिन होय रहेस . कुंभमेला को आयोजन हरिद्वार , परयाग , नासिक आन् उज्जैन मऽ होस . येन चार तीरथ पर ३-३ बरस बाद कुंभमेलो होस ; मतलब येकच जागा पर कुंभमेलो १२ बरस बाद आवस . कुंभमेला को मान गंगा माय , गोदावरी माय आन् सिपरा माय स . कुंभ को मतलब घडो , करसो . समुंदर मंथन मिन आखरी ला अमरीत को घडो निकऱ्यो . वोक साठी देव - दानव की काचाकिची भयी ; तब वू घडो झलके आन् अमरीत का ठेंबना येनऽ तीन नदी म पड्या . घडो जहान झलके वोनऽ जागा पर कुंभमेलो भरस . चार कुंभ भूलोक पर आन् आठ कुंभ देवलोक म होस .
सूर्व्यदेव जब मेस रास म आन् गुरू सिंव्ह रास म रव्हस तब सिपरा नदी पर उज्जैन म कुंभमेलो भरस .
२ . इतिहास आन् मान्यता : * सिपरा नाव को मतलब स पावन नदी , तेज बहाव वाली नदी आन् निरमल नदी !
* सिपरा नदी को उल्लेख यजुर्वेद , मारखंड पुरान , स्कंद पुरान , भागवत पुरान , ब्रम्ह पुरान , अग्नि पुरान , सिव पुरान , लिंग पुरान , वामन पुरान , महाभारत , मेघदूत म स .
* पुरान कऽ अनुसार अतरी रिसी न ३००० बरस घोर तपस्या करी . तप करन क बेरा वून न आपला दुय हात वरतऽ करकन् राख्याता . जब तप पुरो भयो आन् वून न डोरा उघाड्या तब दुय तेज जोती वून क आंग मिसिन निकरी . येक वरतऽ अगास मऽ गयी , जेमिन चंदर देव उपज्यो आन् येक जोत खलतऽ जमीन पर आयी जेमिन माय सिपरा परगट भयी . तेकन च सिपरा को येक नाव 'सोमवती ' बी स .
* येक मान्यता कऽ अनुसार भोलेनाथ महाकालेस्वर कपाल कमंडल लेकन भिकस्या मांगन ला निकऱ्या . वूइ पहुच्या भगवान बिस्नूदेव क घर ! भगवान बिस्नुदेव जी न वून ला तरजनी उंगल दिखाडी . भोलेनाथ जी ला या हरकत अपमान की लागी . वून को पारो भडक्यो . भगवान भोलेनाथ जी न तिरसूल कन् वा उंगल काट डायी . वोमिन भरभर रगत बाह्यन ला लागे . महाकाल जी न आपलो कपाल कमंडल वोकऽ खलतऽ धऱ्यो . रगत कन् कपाल कमंडल भर गयो आन् रगत जमीन पर सांडन ला लागे . वोमिन सिपरा माय परगट भयी . उगम क जागा पर सिपरा माय को पानी लाल रंग को स .
* सिपरा काठऽ सात पुरी म की येक उज्जैन पुरी स .
* नरबदा माय जसी बुध्दी - सिध्दी दाता आन् पाप विनासिनी स , उसीच सिपरा माय मोकस्यदायनी स . सिपरा माय क तीरथ पर भगत ला जलम - मरन क बंधन पासिन मुक्ती भेटस .
* उसी त् नदीना पहाड मिसिन निकरस पर सिपरा माय धरती क गरभ मिन जलमी , तेकन वोला लोकसरिता बी कोस .
* सिपरा नदी आन् भोयर को नातो सनातन स . चक्रवर्ती राजो विक्रमादित्य की राजधानी सिपरा काठ उज्जैन म च होती . मोकस्यदायी महाकाल जी को ठानो बी सिपरा काठ च !
* भरतुहरी आन् गुरू गोरखनाथ जी न सिपरा तट पर तपस्या करकन् सिध्दी पायीती .
* भगवान किस्नदेव , बलराम , सुदामा की पढाई उज्जैन क सांदीपनि रिसी क आसरम म भयीती .
* भगवान सिरी राम जी न सिपरा माय क रामघाट पर दसरथ राजा को सराध करम करेतो , असी मान्यता सऽ .
* सिपरा काठऽ चक्रवर्ती विक्रमादित्य आन् परमार कुर की कुलदेवी ' गढकालिका माय ' को ठानो , महाकाल जोतिरलिंग , कालभैरव मंदिर , मंगलनाथ मंदिर , भरतुहरी गुफा , सांदीपनि आसरम , सिध्दवट , रामघाट आन् कई तीरथ स .
* सिपरा तट पर उज्जैन म कुंभ , महासिवरातरी , कारतिक पुनव , गंगा दसरा ला मेलो लागस .
३. भोयर अन् सिपरा माय : आमी जब मालवा म रव्हत होता तब पासिन आब पावतर सिपरा माय , जोतिरलिंग महाकाल , गढकालिका माय , उज्जयनी पुरी आमारा मुख्य तीरथ स . भोयरना को धारमिक ठानो मनजे उज्जयनी , महाकाल जी की नगरी ..! महाकुंभ की नगरी !!
४ . वर्तमान : सिपरा नदी लंबाई क हिसाबकन् नानीसी स , पर वोकी महिमा अपार ... अपरंपार स. नदी ला माय कव्हनु सरधा स . पर वोमऽ गंदगी , कचरा काडी डायकन् वोको जीव लेनो गलत स , या बात समजस पर उमजत नी . माय सिपरा उगम जवर सुक गयी . नरबदा माय न वोला बाचाडे . नरबदा नदी को पानी पाईप लयन कन् सिपरा नदी क उगम जवर लाये आन् सिपरा - नरबदा को आधुनिक संगम भये . सिपरा नदी म जीव आये... लोगना ला मोकस्य देन साठी आन् महाकाल जी क अभिसेक साठी...
जय जय सिपरा माय.....,,🙏
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
लय साजरी
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Deleteशिप्रा नदी ,अन् वक तटपर बशि उज्जयिनी नगरी , खूब साजरी माहिती.
ReplyDeleteधन्यवाद ढोले सर
Deleteशिपरा नदी क बाराम् अप्रतिम माहीती दिस ।।धन्यवाद 🌷🌷
ReplyDelete👌👍💐
ReplyDeleteखुब साजरी माहिती
ReplyDeleteधन्यवाद मनोज जी
Delete👌👍💐
ReplyDelete🙏🤗
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