Friday, September 4, 2020

भोयरी संस्कृति - २७ : मांडोस , साजवनी ( गुढीपाडवो ) bhoyar people _ bhoyari culture

भोयरी संस्कृति - २७ : मांडोस , साजवनी ( गुढीपाडवो ) 
Bhoyar people _ bhoyari culture

Language of the article : bhoyari dialect _ भोयरी बोली 

अ ] मांडोस , मांडवस : भोयरी संस्कृति मऽ फाग मह्यना क आखरी अवस ( साल की आखरी अवस ) ला महाराष्ट्र मऽ मांडोस तिवार आवस . उत्तर भारत म मांडोस चयीत मह्यना क अवस ला आवस . दिन येकच स पन् महाराष्ट्र को मह्यनो ( शालिवाहन शके ) अवस ला खतम होस त् उत्तर भारत मऽ पुनव ला खतम होस , तेकन मह्यना म १५ दिन को फरक आवस . 
* मांडोस ला मांडवस , मांड अवस बी कोस . मांड को मतलब धरनो , रचनो , बिठानो , थापना करनो . अवस ला चंदर नही दिसत पन् दुसरऽ दिन पासीन थोडो थोडो दिसस आन् रोज मोठो होस . अवस म सकारकन् की आस , उमिद रव्हस . चालू साल मांडोस ला खतम होयकन् नवऽ साल की रचना यासीन होस , तेकन या मांडोस . ठंढी जायकन् उब तपन ला लागस . कठान का खेतना खाली होस . ढोर जनावर साठी खेत मऽ खाकरीना को मांडो बनावस . 
* भोयर पितर पूजक तेकन भोयरी संस्कृति मऽ साल क आखरी अवस, मांडोस ला खास महत्त्व सऽ . मांडोस क तिवार ला पुरन - आमटी आन् पकवान करस . 

आ ] साजवनी ( गुढीपाडवो ) : ब्रम्हध्वजाय नमः 
ब्रम्हध्वज नमस्तेऽ स्तु सर्वाभिष्ट फलप्रदा ।  प्राप्तेऽ स्मिन्वत्सरे नित्यं मग्दृहे मंगलं कुरु ।।
साडेतीन सुभ महुरत म को गुढीपाडवो येक सुभमहुरत .
१. इतिहास आन् मान्यता : * गुढीपाडवा पासीन  ' शालिवाहन शक ' सुरू होस . स्यालिवाहन राजो पयठन ( प्रतिष्ठान ) , महाराष्ट्र म कुंभारबाडा म नाना को मोठो भये . वोनऽ परकऽ मुलुख मिन आया ' शक ' हमलावर ला हाराये . तब पासिन ' शक कालगणना ' चालू भयी .
* भगवान सिरी राम लंका परिन रावन ला हरायकन् अजुध्या म येनऽ दिन आयाता , असी मान्यता सऽ .
* महाभारत क कथा अनुसार चेदी राजो बसू न जंगल म जायकन् जपतप कऱ्या . भगवान परसन्न भया आन् राजा बसू ला बयजयंती माला , येक उडनखटलो आन् राज सुरू करन साठी राजदंड देये . राजा न वोनऽ राजदंड क वरतऽ जरी को कपडो धरकन् वोपर सोना को गोलो बसाडे . वोकी पूंजा करी . इच गुढीपाडवा को पह्यलो सरूप होय , असी मान्यता सऽ . 
* गुढीपाडवा क सुभ महुरत ला साखरपुडो , ब्याह , वास्तुक साठी सुभ मानेस .
* तेलंगना , आंध्रप्रदेस , करनाटक म गुढीपाडवा ला ' उगादि ' ( युगादि ) कोस .
* दुरगा माय क पूंजा को नवरातरी व्रत गुढीपाडवा पासीन चालू होस . 
* मांडोस ला द्वापार युगादी अवस बी कोस .
* ' ब्रह्मपुराण ' क अनुसार भगवान बरमा जी न गुढीपाडवा ला दुनिया की रचना करीस .
* गुढीपाडवा ला युगाब्द ( युधिष्ठिर संवत् ) की सुरवात होस . युधिष्ठिर को राज्याभिसेक गुढीपाडवा ला भयेतो . 
२ . रिवाज : भोयरी संस्कृति मऽ साजवनी ( साजोनी ) ला खूब महत्व सऽ . घर ला आंबा कऽ पत्ता आन् झ्यंडू क फुल की तोरन बांधस . खेत मऽ क मांडो ला बी मोठ्ठी तोरन बांधस आन् मंझार मंझार म तुम्बडी , नारेल बी गुफस . 
घर की लक्षुमी सकारीच घाईपांजी कन् खेत मऽ क साजवनी क पूंजा साठी सी ( सेवरी ) , आमरस , कुरोडी , भाजी - भाकर ( पोळी ) , निवद आन् पूंजापाती को सामान हारा म भरकन् देस . गडीमानुस पह्यलेच बयीलना पर रंग डायकन् वून ला रंगावस आन् झूल लेकन खेत मऽ जास . ज्यान मोह्यतूर का पाच तासना बखरन का होयेन वहान बखर जूतकन् राखस . मालक , पोटुबाटूना खेत मऽ आया पर पूंजा करस . बखर पर पानी सिपडकन् वोला सेंदूर का पाच बोटना लगावस . बखर क आघऽ पान को बिडो धरस . दिवो , उदबत्ती लगावस . नारेल धरस . जूत्या बयील जोडी की पूंजा करस . हरद कुकू , अकसिद वाहस आन् कपूर बारस . मंग बखर का पाच तास हाकलस . पात हाकल्यापर बयील जोडी ला गोड पोळी को निवद देस .गडी ला दकसिना देस . पूंजा भया पर सबन झन खेत मऽ जेवस . घर म लक्षुमी की मोठी धांदल रव्हस . वोला तिवार का पकवान बी रांधन को रव्हस आन् दारपान ( दाळपान ) की तयारी बी करनो लागस . दारपान म सातऱ्या सोला / घुगरी रव्हस . पान पुडो आन् पानदान म गुलाल , गाठी ( बतासा की मार )  धरस . भोयरी संस्कृति मऽ या परंपरा खुब साजरी स . मालक घर आया बाद गडी मानुसना ला , आयकरीना ला , घर म दारपान साठी बलावस . सालदार को साल महासिवरातरी , सिमगा नही त् मांडोस ला होस . आयकरीना की काम्बरकी साजोनी क दिन ठह्यरस . माली , खाती , बाढी , चम्भार , वठ्ठी , भुमक ( आयकरीना ) दारपान साठी घर म आवस . सालदार को साल आन् आयकरीना की काम्बरकी हासी खुसी कन् ठह्यरस . साल ठह्यऱ्या पर सालदार मालक पासिन बिडो लेस . साजोनी क दिन कोनी कुनीला च नाराज नही करत . येकमेक ला गुलाल लगायकन् गाठी देस . दारपान , पानसुपारी होस . 
दारपान म गम्मतबाजी बी खूब होस . येखांदो गडीमानुस बिना दोरी क खाट ( बाज ) पर सनकाडीना धरकन् वोपर दुलयी डायकन् राखस . दारपान ला जी बी गडी , आयकरी , सेजारी पाजारी आया , वून ला वोनऽ खाट पर बसन ला कोस . जसो वू बसस उसोच धाडकन् खलतऽ पडस , आन् सबन लोगना वोकी मज्या लेस . मंग वू बी दुसरा की बाट देखस . आन् कोनी आयो त् वोला वोनच खाट पर बसाडस . सारा को हासन को येकच कल्लो रव्हस .

( सहयोग : सौ पार्वतीबाई महादेवराव देशमुख ) 
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर 

4 comments:

  1. 👌👍 भोयरी सनतिवार की खुब साजरी माहिती

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  2. आपली नान पण की गाव याद ताजी होय गयी भाऊ. खूप चांगलो काम कर रह्योस गा

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  3. खूब साजरो लेख

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