Wednesday, September 30, 2020

भोयरी संस्कृति - ३०: ब्याह ( बिह्या ) का गाना. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

भोयरी संस्कृति - ३० : ब्याह का गाना
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली 

भोयरी संस्कृति मऽ लोकगीत ला खूब महत्व सऽ . हर पीढी क रहन सहन , बोल चाल , खान पान म बदलाव होत जास . आन् या सहज क्रिया स . बखत येकसरखो नी रव्हत . हर घडी वोको रूप बदलस . समाज येक झाड सरखो रव्हस... खूब डंगालना , फानटीना कन वोको फयलाव बाहाडस ...बेगरऽ बेगरऽ रंग का पत्ताना.. पिवरा पड्या पर खलतऽ जमीन पर पडस आन् पंचमहाभूत कन् बनी कुडी पंचमहाभूत मऽ च मिसर जास . पर येनऽ फयले झाड ( समाज ) को बूड रव्हस ' समाज की धारना ' . समाज का रितीरिवाज , लोकगीत , लोककथा , लोककला , नेग दस्तुर इ येक पीढी पासिन आघऽ क पीढी पावतर आवस आन् या साखरी हजारों बरस पासिन कयी बदलावना पचायकन् आपलऽ पावतर आवस . मानुस कयी बी जायेन त् या परम्परा आपलऽ संगच लिजास , मुरपासिन टुट्या नी पायजे मनून !! हरेक मानुस आपलऽ मुर ला .. जड ला कप्पो पकडकन् राखस . 
ब्याह इ हर समाज को महत्त्व को विधी . ... खास संस्कार ! 
ब्याह ( बिया ) का गाना : 
१. देव पितर ला आवाहन : 
 उतरो उतरो सरग का देवना
तुमारऽ घरऽ कारन काज 
तुमी आवजे राखजे लाज
तुमारो आवनो तुमीच संभारो
आवनो नी होत जी आमारो 
काटा कुटा आन् दगड दुगड
सरग की बाट घाडी अवघड
आवनो नी होत जी आमारो ।
उतरो उतरो सरग का पित्तरदेव
तुमारऽ घरऽ कारन काज
तुमी आवजे राखजे लाज
तुमारो आवनो तुमीच संभारो
आवनो नी होत जी आमारो ।
उतरो उतरो सरग का नाना देव
तुमारऽ घरऽ कारन काज
तुमी आवजे राखजे लाज
तुमारो आवनो तुमीच संभारो
आवनो नी होत जी आमारो ।
उतरो उतरो सरग का नंदलाल
तुमारऽ घरऽ कारन काज
तुमी आवजे राखजे लाज
तुमारो आवनो तुमीच संभारो
आवनो नी होत जी आमारो ।

२. नहान क बेरा : 
कोन मोठऽ नांदन की पोटी , सवा घडा दूध नाह्यो वो
आंगना म कादो चिक्खल , सखी कोनऽ कराये वो

३. काकन बांधन क बेरा : 
लुगडो धोतर देयो इनाम , हरि जो सखी न काकन बांध्या
चुलतो देयो इनाम , हरि जो सखी न काकन बांध्या

४. मांडो सूतन क बेरा : 
मंडा सूतन की बखत भयी वो नारी मंझारी , 
सवास्या कोन देव वो नारी मंझारी , सवास्या गोरे देव वो नारी मंझारी 
सवासिन कोन बाई वो नारी मंझारी , सवासिन हीरा बाई वो नारी मंझारी 

५. मांडो डावन ( छाते ) क बेरा : 
कहान सिन लायो हरद्या मोंगर वो , का सिन लायी नांगन बेलनी
आमारऽ राजकुवर घर मांडो.....
कोनतऽ बयील प लायो हरद्या मोंगर वो , चवऱ्या बयील प लायी नांगन बेलनी वो
आमारऽ राजकुवर घर मांडो.....

६. खनमिट्टी ल्यावन क बेरा : 
आरू जाजे कोयल बाई बलखंड , लाजे माती ला खोज
माती बोली म्हरऽ बिन मांडो नी सोभय , धनुती बोलय कोयल

७. सगाई को गानो : 
रान्नी म बसी बाई लाडी वो 
दाआजी ला अरज करे जी 
चांगलऽ घर देजे दाआजी 
पोटी लिल्लोरी घोडी प ल्यानी वो 
चांदी सोनो आमी लेन चले...

८. बरात आया पर : 
गाडी सिन गाडी ठील गयी रे म्हरऽ रंजन भवरा 
केतिक आवस बरात रे म्हरऽ रंजन भवरा
पयदल की नहाय गिनती रे म्हरऽ रंजन भवरा
हाथी घोडा नी मोजदाद रे म्हरऽ रंजन भवरा
बी माडी प चढ चढ देखस रे म्हरऽ रंजन भवरा
वोकी छाती धडाका लेय रे म्हरऽ रंजन भवरा
दार म डावो पानी रे म्हरऽ रंजन भवरा

९. द्वारचार को गानो : 
निकर न् वो बेटी स्याम सुंदरिया
लाडो आयो बरबल देस म 
कसी मु निकरु म्हरी माय यसोदा
दाआजी उभा दरुजा म 
डाल लेजे घूंघट बेटी
वोढ ले जे पदर निरमल झकोर रे....

१०. पडसन ( पडछन ) को गानो : 
( नवरदेव क स्वागत म सासू वोला पडसस )
निकरो न् सासू स्वागत ला , पडसो जावो मजा
पोरग्यो पडसय राजा दसरथ को , पडसो जाजो मजा 
सूपडो बन्यो माय बास को , पडसो जाजो मजा
दीवो बन्यो माय कनिक को  , पडसो जाजो मजा
बात ( बत्ती ) बनी माय रेसम की ,  पडसो जाजो मजा
नांदड बन्यो माय कनिक को ,  पडसो जाजो मजा
मूसर बन्यो माय खयीर को ,  पडसो जाजो मजा
रयी बनी वो माय बास की ,  पडसो जाजो मजा

११. दायजा को गानो : 
( दायजो डावन पर दायजो डावनी वाला को नाव लेकन गानो कोस .)
बांट ऽऽ की लाडऽऽ न लाहूऱ्या लिह्ये वो
लाहूऱ्या लिह्ये वो , डावो न गोरे देव दायजा ...

१२. बिदाई को गानो : 
चीर चीर कमडी को पिंजरो बनायो
येनऽ पिंजरा म रह्य नी पायी , म्हरा गोविंद रे...
पिंजरा की मयना म्हरी उड चली...
दाआजी रोये वोको सेला भीजे
माय की भीजे गुलसाडी रे..
म्हरऽ दाआजी की बेटी बिहानी
काय ला रोये म्हरो गहरो स दाआजी
काय ला दी परदेस जी
रे म्हरऽ दाआजी की बेटी बिहानी 

( साभार : सतपुडा की संस्कृति , २००१ , सम्पादक - वल्लभ डोंगरे )

अनुवाद लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर 





8 comments:

  1. 👌👍💐 खुब साजरी माहिती

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  2. शादी ब्यां ह संस्कार की खूब साजरी माहिती दीस धन्यवाद.

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