Sunday, September 27, 2020

अजब गजब , भाग - ७ : रोंढा सिवमंदिर. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब , भाग - ७ : रोंढा सिवमंदिर
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

मध्यप्रदेस बयतूल पासिन ७ कि.मी. पर स रोंढा गाव . वहान येक मोठ्ठो सिवमंदिर स , जेला गाव का लोगना देऊर , देहुर कोस . येनऽ देऊर क निरमान आन् मूरती क बारा म खूब अन् रोचक कथा , लोककथा स . भोयर , पवार मालवा मिन इत् वूत् बगऱ्या . समाज को वंस क हिसाबकन् राजा भोज अन् परमार इन सिन वंस को नातो स. सबन परमार राजा आन् राजा भोज भगवान भोलेनाथ का भगत . तेकन भगवान भोलेनाथ येक परकार कन् समाज का लोक देवता च ! 
रोंढा सिवमंदिर को आपलो येक इतिहास स . येनऽ इतिहास ला लिख्येस महान साहित्यिक स्व. गोपीनाथ कालभोर जी न . 
१ . इतिहास : रोंढा गाव म ४०० बरस क पह्यले आयकन् बसे कालभोर ( कालभूत ) परिवार का तीन भाई . बालाजी , मूंगाजी आन् कान्हा जी इ तीन भाईना को नाव . मोठो भाई बालाजी का पोटुना फागुजी आन् दल्या जी . दल्या जी को ब्याह तीन डाव भयो पर वून ला पोरग्यो  नही भयो . वून ला या बात बहुत खलत होती . मेहनती आन् खेती बाडी म हुस्यार दल्या महाजन न खूब धन कमाये . वून को पह्यलो ब्याह मटरबाई , दुसरो ब्याह बुन्दाबाई आन् तीसरो ब्याह लडियाबाई सिन भयो . मटर बाई की येक पोटी अनन्दी बाई होती , पर पोरग्यो कोनच लाडी ला नी भयो . पोरग्या क आस म च  दल्या जी भगवान घर गया . दल्याजी कालभोर क देहांत क बाद तीन बी बेवा बायकोना न धन दवलत की हिफाजत करकन् वोला संभारे . वोन बखत बेगराचार नी होतो. सबन कुटुम्ब कबिलो येक म च रव्हत होतो . तीन बी बयना न खेती बाडी , धन दवलत संभालन साठी आपलऽ देर फागुजी क पोरग्या ला गोद ल्यो , वोको नाव होतो नारायन . सन् १८९५ क जवरपास बयना न दल्याजी क इच्छा अनुसार , वून क याद म भगवान महादेव को देऊर बनावन को संकल्प कऱ्यो . असो कव्हस क , जब भी दल्याजी खेत म जाता , पयदल बदनूर जाता तब आपलऽ धोतर म रस्ता पर का गोबर का पोयटा भरकन् ल्याता आन् खेत मऽ डावत होता . याच परम्परा वून क दत्तक पोरग्यान बी चलाई . सन् १९०० स म रोंढा सिवमंदिर बनकन् तयार भयो . 
येक बार बरसाद म देऊर क करसा पर ईज ( बिजली ) पडी . वा सिखर ला चिरकन् , साखरीकन् टंगे घंटा ला स्येदूर करकन् टेढी भयी आन् जमीन म गयी ..सिवलिंग पर वोको थोडोसो बी असर नी भये .
येक बार मोठी उघाड पडी . स्व . गोपीनाथ जी कालभोर बी वोन ऽ बेरा वहान गयाता . भगत लोगना नऽ बारा घंटा ' ॐ नमः शिवाय ' को भजन करकन् जाप कऱ्यो . भगवान भोलेनाथ क किरपा कन् वोनऽ दिन रात म चार बाजता , सकारी नव बाजता आन् बाद म चार पाच दिन बरसाद भयी . झड लागी . 
२. मंदिर विसेस :  * देऊर क मुख्य दरुजा क डाखऽ हाथ पर सिलालेख स . वोमऽ देऊर बनावन की तिथी आन् बनवनी वालाना को नाव खुदेस . पह्यला तीन नाव मटरबाई , बुन्दोबाई आन् लडियाबाई को स .
* येनऽ देऊर की उचाई १०० फुट स . देऊर म जाता बराबर पह्यले नंदी देव की नक्कासीदार  मूरती दिसस . देखनी वालाना को माननो स क मध्यप्रदेस क कोनतऽ बी देऊर म येतरी मोठी नंदी देव की मूरती नहाय . 
* सिवलिंग क वरतऽ क गुम्बज म अंदरीन लाल , हिवरऽ , निरऽ रंग कन् खूब साजरा चितरंगना काहाड्यास . वोम ऽ मोर , घोडो , हरन , सिंव्ह का मुख्य स . 
* रोंढा सिवमंदिर क निरमान म आज क सरखो सिमेंट नही लागेस .  चुनखडी , पतलो गुर ( राब ) आन् बेलफल ला घोटकन् जी मसालो बने , वोला बापरेस . 
* नंदी देव , सिवलिंग आन् बाकी मूरती ना संगमरमर कन् घडाईस , जी जयपूर परिन बंडी पर  ल्यायीती . पुरो येक मह्यनो लागेतो , मूरती ल्यावन साठी !
* देऊर क रखरखाव आन् खरचा पानी साठी तीन बयना न देऊर क नावकन् खेत बी देयेतो . 
( साभार : सुखवाडा , जुलाई २००१ , सम्पादक : वल्लभ डोंगरे - भोपाल , हिंदी लेख - स्व . गोपीनाथ जी कालभोर ) 
अनुवाद लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

9 comments:

  1. सुंदर लेख....... छान माहिती

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  2. हर हर महादेव
    भगवान भोलेनाथ की कृपा प्राप्त हो

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  3. शिवमंदिर देवस्थान क बाराम् अप्रतिम माहीती ।।

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  4. रोन ढा शिवमंदिर की खूब साजरी माहिती.

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  5. Khub sajri mahiti .
    Aamhe gya t Rondha Kai dav per mandir nahi dekyo..😔😔

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