Saturday, September 26, 2020

आंगन ( भोयरी कविता ). bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

आंगन
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

धाम घर को आंगन
तीरथ बिंदराबन
घर दार को अगास
वोला पह्यलऽ वंदन ।धृ।

झुंझुरका झाडझुड
करे सडो सारवन
पुरे चऊक साजरा
लक्षुमी ला आंगवन ।१।

सूर्व्य नारायन आयो 
सोन पिवरो आंगन
मह्यकस उदबत्ती
आवार म गा चंदन ।२।

सजे आंगना म मेढा
तुटे पोरा की तोरन
जोडी बयील की आयी
गोड निवद पुरन ।३।

आयी रास अनाज की
करे पूंजा कार् भारीन
हरखेस घर दार
आंगना म नवो दिन ।४।

ठस्सा गेरु का गोपद्म
गोंदन प गवरन
झलारस दिवारी ला 
आंगना म तारांगन ।५।

पूंजा पाचपावली की
महादेव भगवान
डाये मांडो आंगना म
देव सेंदऱ्या को मान ।६।

आयी पापड की घात
बडी उसरी सबन
खाट पर सी धापोडा
झुमकस पायजन ।७।

ढोर बासरु पाठरु
आंगना म गा गवान
पानी उब क मारा ला
थोपवस सायवान ।८।

पेव अनाज को देव
वोला आंगना म मान
आंग जमीन म रह्ये
पर बाहिर गा कान ।९।

पडे मांडव  हिवरो 
पोटी उजवयी यान
वोकऽ नान्होरा को पानी
आसू आंगन का दान ।१०।

रचना :  सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर





11 comments:

  1. 👌👍💐💐
    खुब साजरी रचना

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  2. आंगन बचपन को मैदान ओम् घर को होय सब काम
    बहुत ही साजरो

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  3. आंगन को महत्व आपल समाजम् खुप जास्त स ।।कार्यक्रम,बिया हिवरो मांडो ,, भावना जुडीस।।👍👍

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  4. आंगनो घरकी शान,खूब मस्त वर्णन कविता.अभिनंदन

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