भोयर पट्टी अन् गवराऊ गाय
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Language of the article : bhoyari dialect _ भोयरी बोली
त्वं यज्ञस्य त्वं माता सर्वदेवानां कारणम ।
त्वं सर्वतीर्थानां नमस्तुते अस्तु सदानघे ।
शशि सूर्यरूपा यस्या ललाटे वृषभध्वज: ।
सरस्वती च हुंकारे सर्वेनागास्च कम्बले ।
क्षुर पृष्टे च गन्धर्वा वेदाश्चत्वार एव च ।
मुखाग्रे सर्वतीर्थानी स्थावारानि चराणि च ।।
' हे निस्पाप गाय माय , तुमी सबन देव देवता की माय , होम- याग की कारन रूपा आन् तमाम तीरथ की तीरथरूपा स . आमी तुमीला हरमेस नमस्कार करूस . तुमारऽ कपार म चंदर , सूर्व्य , अरून आन् महादेव बिराजमान स . हंबर म माय सरोसती , गल कम्बल म नागगन , खूर म गन्धर्व अन् च्यार वेद आन् मुंडा पर चर - अचर तमाम तीरथ को वास स .'
* आयुरवेद म ढवरी ( ढवळी ) गाय , गुत्समद रिसी क आसरम म की गाय या गवराऊ ( गवळाऊ ) होती , येका संदर्भ स .
* गवराऊ गाय भोयर पट्टी म वरधा , नागपूर आन् छिंदवाडा जिला म देखन ला भेटस . या गाय काटक आन् चालन - परन साठी तुफान रव्हस . कम चारो पानी म बी गवराऊ गाय टिककन् रव्हस . उब को फरक येकऽ तब्येत आन् दूध क दरजा पर नी पडत .
* जंगल पहाडी म रवनी लाइक बांधो आन् तोंडवरो ( चेहरा पट्टी ) गवराऊ गाय की वोरख ! दगड गोटाना म चलन साठी खोल आन् जुडी खूर , लंबऽ स्येपूट को कारो गोंडो , पासऽ मुड्या सिंगना , मोठाला कारा बदामी डोरा , लंबो डोकसो , मुंडा को आगलो कारो भाग असी येकी ठेवन रव्हस .
* सबन देसी गाय म गवराऊ गाय को तोरोच न्यारो !!!
* गवराऊ गाय क बासरू क कपार ( माथा ) पर जलमताच लाल टिको ( चांद ) रव्हस . वू टिको २१ दिन क बाद आपरंगच मिट जास .
* पांढरी भुरी गवराऊ गाय लंबी चवडी , उच्ची पुरी दिसस पन् रव्हस सिफार !!!
* स्यास्तर क भास्या म गवराऊ गाय Bos Indicus कुर की होय .
* इंग्रजी म येला Gaolao , हिंदी म गावलाव , गौलगनी आन् मराठी म गवळाऊ गाय कोस .
* दूध क दरजा साठी गवराऊ गाय आन् खेत कऽ काम साठी गवराऊ बयीलजोडी परसिध्द स .
* गवराऊ गाय ५ - ७ लिटर दूध देस . दूध की डिगरी ( फ्याट को परमान ) ५.५ रव्हस . जंगल क चाराकन् दूध म दवाई को गुन जास्त रव्हस . आयुरवेदिक दवाई म गवराऊ गाय क तूप ला च पसंद करस . गवराऊ गाय को तूप हात पर चोरे त वू चमडी म जीर जास . येनऽ तूप को सुगंध जेनऽ येक डाव ले , वू दुसरऽ तूप की याद च भूल जास . गवराऊ गाय की किंमत ५० - ६० हजार रुपया आन् बयीलजोडी को भाव ६० - ८० हजार रुपया स . तूप देड हजार रुपया किलो क भाव कन् खपस .
१. इतिहास : * भगवान सिरी किस्न गायकी / ढोरकी क रूप म कौंडन्यपुर ला आयाता . वून क संग २००० गवराऊ गायना आन् वोतराच सोबतीना होता . वहान लढाई भयी आन् रुखमिनी हरन करकन् सिरी किस्न द्वारका ला गया पर गवराऊ गायना आन् सोबतीना यहानच रह्या . जंगल को चारो खायकन् ६००० बरस म गवराऊ गाय को वंस बाहाडे .
* गोंड राजा पर हमलो करन साठी दुसरऽ राजानऽ गवराऊ वंस ला बापरेतो .
* इंग्रज लोगनान ऽ गवराऊ वंस को पह्यलऽ बेरा अभ्यास करकन् , पहाडी जागा पर वाह्यतुक साठी येला बापरे .
* इ. स. १९४६ म इंग्रज राजवट म वरधा जिला क कारंजा तहसील म हेटिकुंडी ला गवराऊ वंस क जतन आन् पयदास साठी केंद्र चालू करे . तब येन केंद्र जवर ८२० येकट जागा होती . वोमीन २५० येकट म गवराऊ वंस साठी चारो बोवत होता . वहान कचेरी , कोठाना , चारो धरन की जागा , वहान काम करनी वाला बाबूलोग अन् मजूर साठी घरना बांध्याता . देस क येकलऽ गवराऊ पयदास केंद्र का दिन फिऱ्या . जुनी इमारतना टुटन ला आयी . जमीन को बटवाडो भयो . दरुजा टुट गया . छत टुट गयी . काम करन की आस्था खतम भयी . सरकारी काम क अलाली कन् केंद्र की दुरदस्या भयी . देखभाल करन साठी सिरफ तीन मजुर रह्यास . इ केंद्र मेरघाट लेन जान की कोसिस भयी . केंद्र बंद करन की बी कोसिस भयी . वोला खासगी कंपनी ला देन को बी खेल भयो . पर जागरूक लोगनान ऽ वरधा जिला को इ वयभव आंदोलन करकन् बाचाडे . पर हालत आब बी खराब च स . भोयर पट्टी को भूसन गवराऊ वंस खतम होन क रस्ता पर स .
२ . गवराऊ वंस क दुरदस्या का कारन : * जंगल म गायना चरावन ला सरकार की मनाई .
* ' बोर अभयारण्य ' म बाघ क वंस की राखन करन कारंजा तहसील को मोठो जंगल बफर झोन म गयो .
* जूना पडितना उठित भया .
* गायना चरावन साठी गायकी / ढोरकी मानुसना की कमी .
* जास्त दूध साठी परदेसी मुलुख क वंस जरसी , होलसटीन फ्रिसियन वान को सरकारी परसार .
* २००५ म हेटिकुंडी केंद्र ला बंद करन की बी कोसिस भयी .
* सरकारी अनास्था .
# गवराऊ वंस क जतन साठी , ' गवळाऊ गोवंश जतन , संवर्धन , संशोधन व पैदासकार चॅरिटेबल ट्रस्ट ' या स्वयंसेवी संस्था चांगलो काम कर रहीस .
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
👌👍💐 खुब साजरी माहिती
ReplyDeleteधन्यवाद मनोज जी
Deleteजय हो गाय माता की
ReplyDeleteहमारी समाज की रिड़ है गऊ
बहुत ही साजरो
अभिनंदन
धन्यवाद सर
Deleteखुप साजरी जानकारी 👌👌
ReplyDeleteदेशी गाय क बारा म खूब साजरी माहिती दीस धन्यवाद.
ReplyDeleteधन्यवाद सर
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