Friday, September 25, 2020

अजब - गजब भाग - ६ : वान्नेर कुंड. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

वान्नेर कुंड - येक पावन तीरथ    
Language of the article :  bhoyari dialect _ भोयरी बोली                                                                                           
वानर कुंड इ एक नानीसी जागा सं . वर्धा जिल्हाम s  ढगाको जंगल सं । वर्धा कारंजा रस्ता परीन अंदर जंगलमs इ वानर कुंड सं । लोगनाक s मन मं येनं जागा परती खूब आस्था सं । तसो इ वान्नरकुंड बामनवाडा गावक s सिवारमच आवस , येनं कुंड s कं पानी कन जेन आंग धोये ओका समदा दुख दूर होस,समदी बेमारी दूर होय जास  असो लोगना को समज स s। उनारा मं जवरपास कं गावम s पानी नी रवत, आसपास का नदी नालाला पानी नी रवनार तरी वानर कुंड को पानी कबच आटत नही । येलाच आपला समदा भोयर लोगना वान्नर कुंड कोवस। वाsन बाराईकाल एक मायराज रवस । वाsन स्यनकरजीको देऊर सं । वाsन मायराज रोज देऊर की सापसपाई अन पुंजापाती करस।  वान जंगलम s आसोल, बाघ , रोई असा जनावरना आवस तेकोबी ओन मायराजला भेव नही । वाsन कुंडपर जानको भयोतं  कोनतो जनावर नी  ती देखकनच जानो बारू।                                          वान्नरकुंडकी एक लय जूनी कथा चली आय रही वा कथा असी सं कं  - सतयुग मं सिरीरामला जबs वनवास भयो तब वुई जंगलमीन जात होता तबs जाता जाता उनला उनकs मारगमं धम्म नावको ऋसी तप करतानी दिसे तं सिरीराम उनको दरसन करनला थांब्या । उनला पेनला पानी पायजे होतो पर वान आसपास पानी को पतोच नइ होतो । तब धम्मरुसी नं उनला एक जागा कित s बोट दिखाडकन जिमीन पर बान मारनला लगाये । तं वायसीन पानी को झरझर झरो बह्यनला लाग्यो । तबीन पासून तं आबलुकवरी  वान्नर कुंड झराको पानीमं कबच कमी नी आयी । असो सं उ सतयुगक s सत  , तेकनच आब s बी पानी नी आटत , ना ओन पानी की चव बदली अन नी रंग बदले । पानी पेनला गोड सं । निरमय सं । समदा रोगराई ला दूर करस असी वान्नरकुंड क पानी पर लोगना की सरद्धा सं इस्वास सं । भक्तीभावकन समदा वान जास। सिरीरामनs जेन s बान कन जिमीनमीन पानी काह्यडे उ बान आबबी वान वान्नरकुड जवर धरेस । लोगना ओकी बी पुंजापाती करस । वान्नर कुंड कं भवताल लय दाट झाडी सं । पुरो जंगल सिवार सं तरी सरद्धा कं आघ कइच नही देखत अन वान्नरकुंड पर जास , उनला वा s न फायदो होस। येतरा बरीस भया पर ओन पानी मं कदी चिला नी भयो कं खराब बास नी आयी इ ईस्वरकी लिलाच सं कवनो। कुंड को पानी दुसरं टाकाम s सोडेस वाsन ढोर बासरूंना , जंगलका जनावरं ना पानी पेस । पानी को जेत्रो उपसा करे ओतरो पानी तयारच रवस । असो इ सदा पानी रवनारी एक खूब साजरी जागा सं , जी मानूस रवो , ढोरबासरू रवो कं जंगलमका जनावरना रवो समदाक जीवला सुख देस । वान्नरकुंडपर आखाडी कं एकादसला वर्धा क कोनी संकरराव अग्निहोत्री महापरासाद करस ,लय लोगना महापरासादला जास। उइच नी तं आपला भोयर पट्टा का लय लोग आस्था कन वा s न जास।     
                                           लेखिका :    सौ. प्रिया पुरुषोत्तम कालभुत ,  वरोरा जिल्हा. चंद्रपूर                       

1 comment:

  1. 👌👍💐 खुब साजरी माहिती प्रियाताई

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