Wednesday, September 23, 2020

भोयर अन् नदी माय - ५ : बेतवा. bhoyar culture _ भोयर लोग..... bhoyari dialect _ भोयरी बोली

भोयर अन् नदी माय - ५ : बेतवा
Bhoyar culture _ भोयर लोग
Language of the article : bhoyari dialect _ भोयरी बोली

विंध्याचल परबत माला म रायसेन जिला क कुमारा गाव जवर बेतवा नदी को उगम स , " झिरी ". येनऽ झिरा मिन हजारों बरस पासिन पानी निकर रह्येस . झिरी क आसपास ५००० बरस पासिन ज्या ज्या संस्कृतिना नांदीस , वकी निस्यानी आब बी वहान सापडस.. मानुसना जब गुफा म रव्हत होता , वा कई गुफा यहान स . ताम्रपास्यान जुग का अवजार आन् अवसेस बी सापडस . 
बेतवा नदी को पुरान काल को नाव " वेत्रवती "! बेतवा बुंदेलखंड पठार की सबसिन मोठी नदी .
बेतवा नदी क सम्मान म भारतीय नौसेना न आपलऽ येक युद्ध नौका को नाव राखेस , " INS - बेतवा " .
१. इतिहास आन् मान्यता :  * रामायण - महाभारत काल म बेतवा काठऽ ' दशाण ' राज होतो , जेकी राजधानी विदिशा होती . 
* बेतवा नदी पर चक्रवर्ती राजा भोज न भीमताल बांध्येतो . भीमताल को फाडी को बांध ४० फुट उचो आन् १०० फुट चवडो होतो . भीमताल की आराजी २५० वर्ग मील स. येमऽ ३६५ जलधाराना को पानी होतो .  
* राजा भोज ला येक बिमारी भयी... दवादारु , वयीद हकिम कन् आराम नही पड्यो . तब येक बयरागी साधु न उपाव सांगे क ३६५ जलधारा ला ३६५ दिन म जोडकन्  , ३६५ दिन नहायकन् रोज सिवजी की पूंजा करन की . भोजपुर क पहाडी को आकार ओमकार रूप मऽ स .
राजा भोज को सरदार कालिया / कल्यान सिंव्ह न या जबाबदारी लेयी . वून न भोजपुर जवर बेतवा नदी म आवनवाली ३५९ जलधारा खोज्या , पायजे होता ३६५ ! वून न अनखिन् ५ झिरा को सोध लगायो... आब भयी ३६४ च ! तब वून न आब क कमला पार्क महल पासिन येक धारा बांध जवर ल्यायी , जेला कल्यान सौध / कालिया सोत कव्हस . चिरा - फाडी कन् बांध बांध्यो .. पर बिना चुना सिमिटकन् !
राजा भोज की बिमारी दूर भयी..  
* पूंजा साठी बांध क येक सिरा पर , टेकडा सरखी जागा पर भगवान भोलेनाथ को देऊर बनायो . वोला कोस '  भोजेश्वर ' मंदिर . वहान गाव बसे , ' भोजपुर ' . भोजपुर क मंदिर को बांधकाम भये राजा भोज क ' समरांगन सूत्रधार ' येनऽ वास्तुस्यास्तर क ग्रंथ क अनुसार . यहान को सिवलिंग येकच लाल पथ्थर कन् बनेस , जी आकार म पुरऽ दुनिया म मोठो स . येकी उचाई २१.५ फिट , घेरो १८ फिट ८ इंच आन् जलहरी २० x २० फिट की स . येन मंदिर क सबन  भाग का नकास्या जवरच पास्यान पर खुद्या स . पर बांधकाम अधुरो स . भोजेश्वर मंदिर ला मध्य भारत को सोमनाथ कव्हस . 
* येक मान्यता कऽ अनुसार द्वापार जुग मऽ कुंती माय साठी इ देऊर पांडव न बांध्ये. वोला येक रात म च बांधन को होतो , पर सकार भयी आन् बांधकाम अधुरो रहे. कुंती क दाआजी को नाव बी राजा भोज होतो . 
* पद्म पुरान कऽ अनुसार चम्पक नगरी को राजो विदारून को कुस्ठ रोग यहान क पानी कन् खतम भयो .
* येक मान्यता कऽ अनुसार कुंती माय न तान्हऽ करन ला बेतवा नदी म सोडेत्यो . 
* भोजपुर जवरच पाराबती गुफा आन् आस्यापुरी स . आस्यापुरी म राजा भोज न आपलऽ गुरू की समाधी बांधीती. वहान कंकाली माता की मूरती बी स. 
* भोपाल / भोजपाल नगर राजा भोज न बसाडेतो. यहान २०११ म राजा भोज की भव्य मूरती की स्थापना भयीस .
* बेतवा नदी पर कूर्मराजा की महाभारत काल की नगरी चंदेरी स . यहान की चंदेरी साडी परसिध्द स .
* चरनतीरथ पर तिरवेनी संगम स. यहान तिरवेनी मंदिर , चरन तीरथ मंदिर , भगवान सिरी राम मंदिर , च्यवन रिसी को आसरम स . 
* विदिशा राजा दसरथ को नानो बेटो स्यतरुघन क नानऽ बेटा स्यतरुघाती की राजधानी ! विदिशा जवरच भद्रावती चेदि राज आन् महाराजा सुदरक की राजधानी . बानभट्ट न यहान क रामघाट पर कादंबरी लिखीस . विदिशा को उल्लेख मेघदूत म स . 
* काल्पी ला पारास्यर रिसी आन् सारस्वत आसरम स .
* देवगढ ला परसिध्द दस्यावतार मंदिर स .
* टिकमगढ / टेहरी ला जानकी रमन मंदिर , नानी देवी मंदिर , स .
* ओरछा बुंदेला राजवंस की राजधानी . बुंदेला राजा की रानी होती परमार कुर की ' रानी गनेसकुंवर ' . वा मोठी रामभगत होती . वोन सरयु नदी मिन बाल राम की मूरती ल्यायी . राजानऽ मोठो देऊर बनायो . मुरती ल्यावता ल्यावता रानी ला झाक पडी . वोन वा मूरती आपलऽ महाल म धरी . सकारकन् मूरती ला मंदिर म मांडबो , असो बिचार करे . दुसरऽ दिन त मूरती न हालन को नावच नी ले. वोकी स्थापना वहान च भयी . इ येकलो मंदिर स ज्यान भगवान सिरी राम की " राजा राम " क रूप म पूंज्या होस आन् राजा सरखीच सकार अन् झालपड्या मान की सलामी देस . या बात स १६३१ साल की आन् येन सालच रामचरित मानस को लिखन को काम पुरो भयो . असी मान्यता सऽ कऽ भगवान सिरी राम रात म अजुध्या आन् दिन म ओरछा ला रव्हस . 
* बेतवा क काठ स परसिध्द आल्हा उदल क मामा वीर माहिल की नगरी , ' उरई ' . यहान मौनी मंदिर स्यक्तिपीठ स . 
* बेतवा नदी ज्यान यमुना नदी ला भेटस , वोनऽ संगम पर हमीरपुर स . यहान सिंव्ह महेस्वरी ( संगमेश्वर ) , चौरादेवी , बांके बिहारी मंदिर आन् निरंकारी आसरम स . 

२ . उत्सव आन् मेला :  * भोजपुर महासिवरातरी आन् संगरात ला मेलो भरस .
* बेतवा बुंदेलखंड की गंगा . ओरछा म गोधुली बेला पर  ५.३० बज्या रोज बेतवा माय की आरती होस .
* रंगाई म खूब मोठो रामलीला मेलो भरस .
* टिकमगढ म हर नवरातरी ला मेलो भरस.
* हमीरपुर म चयीत मह्यना म मेलो भरस . 

लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर 

 

5 comments:

  1. बेतवा नदी और भोजपुर शिव मंदिर की जानकारी इतिहासिक जानकारी को अपनी बोली भाषा में लिखा बहुत बढ़िया शानदार भैय्या जी

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  2. बेत्वा नदी भोयर पवार समाज ला संबल देनुवाली जीवनदायी नि खूब साजरी जाणकारी।

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  3. सुन्दर प्रस्तुति सर ।।वाह बेतवा नदी माय क बाराम् इत्तंभुत जानकारी प्रस्तुत करकन अवगत करनसाठी ।।धन्यवाद

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