तानापाजन
( भोयरी कविता )
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
चले परपंच को खासर
सूर्व्य चंदर चाक कन
पूंजी पाचवी ला हरमेस
जिनगानी म तानापाजन ।१।
रितीरिवाज की च चाकोली
संग ऽ मंगऽ अस्तुरी साजन
येक पावल्या म आघ पास
जिनगानी म तानापाजन ।२।
भया बारबन बारदाना
सिवन ला सुतरी दाभन
फाटे नसीब को गा अगास
जिनगानी म तानापाजन ।३।
सुखी संसार म मीठ खडो
राग लोभ को गचकरन
गयी कहान समझदारी
जिनगानी म तानापाजन ।४।
खोसी कंबर हाले अंबर
बांधी बिसवास की तोरन
आब लागे हलकी हलकी
जिनगानी की तानापाजन ।५।
रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
खासर चले ... वाह खुप साजरी प्रस्तुती
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Deleteखूब साजरी माहिती.
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Deleteखूब साजरी
ReplyDeleteधन्यवाद सर
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