Saturday, January 9, 2021

म्हरो सेव तडफडे ( भोयरी कविता ). bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

म्हरो सेव तडफडे
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

नवो जीव स्यक्ती सिव
माय बाप ला हरिक
देखे सपना की बाट
क्यालेंडर की तारीख ।१।

बाट नव मह्यना की 
धीर धरे कवरीक
आयी किलकारी कानऽ 
गोड मुंडा म खारिक ।२।

सुख दुय चार दिन
मंग घडे आकरीत
नाना नाना जीव बऱ्या
जसा भटा को भडीत ।३।

माय बाप हयऱ्यान
थारा पर नही चित
पोटु देकन हिसके
असी कसी बापा रीत ।४।

देव नाव ला च बट्टो
दिवा घाव चवरी कऽ 
बुझे जलम को सूर्व्य
जगे कसा तवरीक ।५।

तोला काय स रे कमी
काहे लिजाया तुरुत
म्हरो सेव तडफडे
पान्हो बहे अमरीत ।६। 

( भंडारा क दुर्घटना म तडफड्या नाना जीव अन् वून क माय बाप ला समर्पित ) 
०९/०१/२०२१

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर 


6 comments: