झ्येंडो
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
सोना सरखी झलारत उन आयी सकार क ठंडी म..
पोटुबाटूना की कलकल...
झ्येंडा क गोल वटला को रंग बी ताजो च !
वकऽ भवताल पुरीस रांगोरी फुल कन् सजायकन..
भुरऽ मयदान म पांढरऽ चुना की पट्टीना
खडा गोटा , कचरोकाडी सबन साफसूफ
घर क आंगना सरखो !
झ्येंडा क पासऽ गुरजी की लाईन ,
पि.टी. मास्तर मातर झ्येंडा जवर...
तमाम पोटी पोटूना लाईन म उभा .
हेडमास्तर न खोली झ्येंडा की पांढरी दोरी
तिरंगो सर सर गये माथा पर
आन् लह्यरे समुंदर क लाट वानी ..
वासिन करी फुल की बरसाद !
निरऽ अगास म फयल्यो तिरंगा को इंदरधनुस !!!
बह्यती हवा न पकडे सूर....
.... जन गण मन अधिनायक जय हे........
आब तिरंगा पर हवा की लह्यर क जागा प
राष्ट्रगीत की लह्यर बह्य रहीती..
तिरंगा न वरतीन देख्ये..
खलऽ पांढरऽ कपडा क वरतऽ कारा कारा डोकसाना..
सिनो तान कन माथा प हाथ !
आपलऽ कुटुंब कितऽ वोनऽ निरऽ अशोक चक्कर क डोरा कन नजर घुमायी..
फड ऽ फडऽ फडऽऽ...
झ्यंडो फडफडन ला लागे जोरजोर कन
आपलऽ पोटुबाटूना क डोकसा पर हाथ फिरवन साठी !!
तिरंगा म का सारा रंग सुट्या कपडा मिन आन्
हरेक क सास म घुल्या माती क सुगंध सरखा .
भरोसा क अंतराल मिन आवाज गुंजे...
.. जय हे ऽ.... जय हेऽ.... जय हे ऽ..
जय जय जय जय हेऽऽ......
तिरंगा को हिरदो भरकन आये
वोकऽ लह्यर कन निरऽ अगास को समुंदर झलके...
टप्.... टप्....टप्.....
रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
खूब साजरी माहिती।
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Deleteझेंडा क बाराम् खूप साजरी माहीती दिस् 👌👌👌
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