Tuesday, January 5, 2021

तानापाजन ( भोयरी कविता ). bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

तानापाजन
( भोयरी कविता ) 
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

चले परपंच को खासर
सूर्व्य चंदर चाक कन
पूंजी पाचवी ला हरमेस
जिनगानी म तानापाजन ।१।

रितीरिवाज की च चाकोली
संग ऽ मंगऽ अस्तुरी साजन
येक पावल्या म आघ पास
जिनगानी म तानापाजन ।२।

भया बारबन बारदाना
सिवन ला सुतरी दाभन
फाटे नसीब को गा अगास
जिनगानी म तानापाजन ।३।

सुखी संसार म मीठ खडो 
राग लोभ को गचकरन
गयी कहान समझदारी
जिनगानी म तानापाजन ।४।

खोसी कंबर हाले अंबर
बांधी बिसवास की तोरन
आब लागे हलकी हलकी
जिनगानी की तानापाजन ।५।

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर 

6 comments: