दोस्त दिवा की गा बाती
( भोयरी कविता )
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
म्हरा दोस्तना सोबती
गाऊ केतरी महती
मोठ पन म आसरो
नान पन का खबती ।धृ।
घरबार नातगोत
दिठ लागन जोगती
अडी अडचन आये
धाये जीव का सोबती ।१।
नानऽ मोठऽ उमर का
हम उमर बी साथी
गोड टिखट खारट
कोनी चिटी कोनी हाथी ।२।
कब रुसे रागो भरे
जीवलग संगी साथी
दुय स्यबद को फेर
मन भर धूरमाती ।३।
कट्टी दो को खेल न्यारो
मन सम् जावन साठी
आब रुस्या आब मिऱ्या
चमकस गारगोटी ।४।
जिंदगानी को आयनो
दिखाडस गा सोबती
नातगोत गुताडा म
नाय दोस्त बिना गती ।५।
खावो केतो पकवान
लोन कन् सजे थाटी
सुखदुख क अलोनी
चव आनस सोबती ।६।
नातगोत धरम का
दोस्त करम की नीती
करो केतो बी दांगडो
कुडी की आखर माती ।७।
जल्म्या बास्त झुगझुग
जरे जीवन की जोती
मायबाप गोत तेल
दोस्त दिवा की गा बाती ।८।
रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
👌👍 खुब साजरी रचना
ReplyDeleteधन्यवाद मनोज जी
Deleteखूब साजरी रचना।
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