अजब गजब - ३६ : कंकाली माता
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
माय कंकाली को नाव ल्या बराबर आमाला जगदेव परमार राजा की याद आवस . जगदेव राजा न आपलो मस्तक काटकन् माय कंकाली ला अरपन करेतो . वून क बलिदान कन् माय कंकाली परसन्न भयी आन् राजा जगदेव ला जितो कऱ्यो . राजस्थानी लोककथा म जगदेव परमार क नाव कन् परसिध्द जगदेवजी मालवा म लक्ष्म देव ( लक्षुमनदेव ) क नाव कन् परसिध्द भया . वून को राज इ.स. १०९५ पावतर रहे .
आज माय कंकाली की अजब गजब कथा सांगुस . मध्यप्रदेस क रायसेन जिला म गुदावल क्षेत्र म माय कंकाली को देऊर स . माय कंकाली को देऊर भोपाल पासिन २० कि.मी. आन् रायसेन पासिन ३० कि.मी. दूर स . कंकाली माय क मूरती की गरदन ४५ ° टेढी स , ज्या साल भर म येक डाव दसरा क दिन सीधी होस , असी मान्यता स .
मध्यप्रदेस को इ पह्यलो अस्टकोनी देऊर स . देऊर क १० हजार वर्ग फिट हॉल म येक बी पिलर नहाय .
कंकाली माय को देऊर इ.स. १७३१ क आसपास बन्यो . गुदावल क हरलाल मेडा क सपना म कंकाली माय आयी . सपना क हिंद्यान कन् ज्यान खंदे वहान माय कंकाली की या परमार काल की मूरती सापडी . मूरती जमीन म दबीती , वोला खंदकन् निकारे , असी मान्यता स . ज्यान मूरती सापडी , वहान च वकी स्थापना करीस .
जी बी भगत यहान बंधन बांधकन् मन्नत मांगस , वा पुरी होस असी मान्यता स . मन्नत / नवस पुरो भया बास्त बांधे ती बंधन खोल देस .
संतान सुख साठी हजारों लोगना माय कंकाली को आसिरवाद लेन साठी यहान आवस . संतान सुख साठी बाईलोगना देऊर पर गोबर क उलटऽ हाथ की निस्यानी लगावस . आन् मनोकामना पुरी भया बाद सीधऽ हाथ को निस्यान लगावस .
नवरातरी म यहान मोठो मेलो लागस .
जय माय कंकाली ऽ......
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
धन्यवाद सर
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