Friday, November 13, 2020

डोयरा ( भोयर संस्कृति _ भोयरी बोली )

गायगोंधन क दिन आन् पंचमी पावतर भोयरी संस्कृति म डावस ती डोयरा

डोयराना म हासी मज्याक , चिडवन की बात च जास्त रव्हस . 
होऽऽ .... असो बोल्या बास्त बजावनी वाला बजावन को थांबाडस . आन् डोयरो डायकन् भया पर वापिस बजावन ला लागस...

१. कारो कारो खेत , खेत म लगायो दादा ऊसऽ....
दस रुप्या निकरत नी , पटिल मोठो दादा कंजूस ऽ....होऽ...
२. कारी रे कुतरी..कारी रे कुतरी , वोपर डायी झूऽल....
म्हथारपनऽ लेकरु भयो दादा , चमेली को फुल ऽ....हो ऽ..
३. खोबरा को डोल भाऊ , दादा खोबरा की बाटी ऽ...
( नाव ) पटिल की बेटा बेटी गा भाऊ , खास तूप रोटी ऽ...हो ऽ...
४. पाट्या को रे पारनो ऽ...आजी पाट्या को पारनो ऽ...
वोमऽ लगायी गा काच...
मोठऽ बाडा की आरती आयी बापू , अगर बगर नाचऽ... होऽ...
५. टाको रे टाको दादा.., सिमिट को टाको ऽ...
वोमऽ भरे पानी ऽ....
सेम्बर रुप्या की नोट नी निकरत..
कसी होयेन जिंदगानी ऽ.....होऽ...
६. सात तस्मा की माडी बांधीस , मालकीन तरी रोस...
बारा मह्यना म फानकी आवस , धड धड छाती होस ऽ... होऽ....
७. इथिन बी काटा न् उथिन बी काटा , मंझार मिन पड्यो रस्तो ऽ...
आपलऽ घर को मह्यंगो दिसस , आन् दुसरा घर को सस्तो ऽ....होऽ...

संकलन : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

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