अजब गजब - २९ : हिंगलाज गढ
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
हिंगलाज गढ मध्यप्रदेस क पसचिम मालवा क मन्दसौर जिला म भानपुरा तहसील म स . ११ वी सदी म परमार राजाना न मन्दसौर पासिन १६५ कि.मी. आन् भानपुरा पासिन २६ कि.मी. दूर येनऽ अदभूत गड ला बनाये .
हिंगलाज गढ मध्यप्रदेस आन् राजस्थान क हद जवर स .
हिंगलाज गढ ८०० बरस पावतर मूरती कला को केंद्र रह्ये . किल्ला म सापडी वा मूरतीना गुप्त आन् परमार काल की स . यान सापडीस मूरतीना म सबसिन पुरानी मूरती १६०० बरस पुरानी स .
यासीन नंदी आन् उमा - महेस्वर की मूरती फ्रांस आन् वासिंगटन म भये ' इंडिया फेस्टीवल ' पठायती .
इतिहास : * भानपुरा तहसील क नावली गाव म पहाडी प बन्यो हिंगलाज गढ को इतिहास लय पुरानो स . गढ म सापड्या सिलालेख यहान को पुरो इतिहास सांगस . पुरानऽ जमाना मऽ चित्तौड पर राज करनी वाली तक / तक्षक जाती को सम्बध मोरी जात संग होतो . परमार येनच मोरी जात का वंसज होय , असी मान्यता स . परमार काल म हिंगलाज गढ लढाई क हिसाबकन् खूब काम को होतो , तेकन परमार राजाना न येला मजबूत बनाये .
* इ.स. १२८१ म हाडा राजा न येपर कब्जो करे . बाद मऽ इ गढ चंदरावत राजा को भये .
* इ. स. १७७३ म महारानी अहिल्याबाई होलकर न लछमन सिंग चंदरावत ला हाराये . होलकर काल म यहान क हिंगलाज माता मंदिर , राम मंदिर , सिव मंदिर ला सुधारकन् साजरा बनाया .
* हिंगलाज गढ म पाटन पोल , सूरज पोल , कटरा पोल आन् मंडलेस्वरी पोल क नाव का चार दरुजा स . पह्यला तीन सूर्व्यमुखी आन् चवथो पसचिम मुखी स .
* गढ प पानी साठी सूरजकुंड स .
* परमार काल म इ गढ खूब नावाजेतो आन् मूरती कला खूब वयभवस्याली होती .
* राज क लढाई म इ.स. १५२० पासिन इ.स. १७७२ पावतर इ गढ निरवासित राजाना की राजधानी रह्यो .
* गढ क भवताल घोडा क नाल सरखी ३०० फिट गह्यरी खाई स .
* हिंगलाज गढ पह्यले पासून को स्यक्तिपीठ स . यहान कयी देवीना की मूरतीना सापडीस . पर वोमऽ ' गवरी ( गौरी ) ' की मूरतीना जास्त स .
* हिंगलाज गढ परमार वास्तु कला को बेजोड नमुनो स .
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर .
हिंगलाज गढ़ की अद्भुत जानकारी अभिनंदन भैय्या जी
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Deleteखूब साजरी माहिती.
ReplyDeleteधन्यवाद सर
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