अजब गजब - ३१ : भानगढ़ की भानगड
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
राजस्थान म अलवर जिला क अरावली पहाडी म सरिस्का अभयारन्य क हद पर ' भानगढ़ ' स . भानगढ जवर गोला गाव स . भानगढ पहाडी क ढलान पर स . वोकऽ आघऽ तलाव स .
भानगढ किल्लो भेव लागन जोगती स . यहान भूत पिसाच्च , आतमा रव्हस , असी लोगना की धारना स . वसाड पडे येनऽ किल्ला म दिनबुड्या बाद कोनी थांबत नी . भानगढ क रस्ता प दुय आंग दुय मजली दुकान का खंडारा स .
इतिहास : * इ.स. १५७३ म आमेर का राजा भगवत दास न भानगढ ला आपलऽ नानो पोरग्यो माधो सिंग साठी बनायतो . माधो सिंग वहान इ.स. १६१३ ला रव्हन ला गये .
* माधो सिंग न वहान रव्हनी वालऽ बाला नाथ नाव साधू ला बिचारकन् येला बांधेतो . साधू बाबा की की येकच अट होती क किल्ला की सावली ( छाया ) वोकऽ घर प नी पड्या पाह्यजे . माधो सिंग क वंसज न किल्ला ला अजून उच्ची करे . जेकन वोकी सावली साधू बाबा क घर प पडी . तब साधू बाबा न सराप देये आन् भानगढ किल्लो बरबाद भये... उजड गयो .
* दुसरी बात बी अजब गजब च स . भानगढ किल्ला की राजकुमारी रतनावती देखन ला घाडी च चांगली रूपवान होती . जवर च रव्हनी वालऽ तांतरिक सिंधिया सेवडा को राजकुमारी प मन बसे . वोनऽ आपलऽ जादू टोना कन् राजकुमारी ला वस म करन की बात सोची . वोनऽ तेल ला मंतऱ्यो . जब राजकुमारी की सोबतीन वोकऽ साठी तेल लेन ला हाट म आयी तब तांतरिक न जादू टोना वालो तेल वोला देये . वापिस आवता आवता वा तेल सिसी खलतऽ पडकन फुटी . जेनऽ चट्टान प वा सिसी फुटी , वा जादू क तेल कन् फुटी आन् घसरन ला लागी . वोनऽ चट्टान क खलतऽ तांतरिक चेप्यो . मरन क पह्यले वोन भानगढ ला सराप दे क यहान कोनी च नी रह्येन ... भानगढ वसाड पडेन..!
* येन घटना क बाद अजबगढ संग क लढाई म भानगढ हाऱ्यो . बाद म इ.स. १७२० म जयपूर क महाराजा सवाई जय सिंग न वून ला मार कन् भानगढ पर कब्जो करे . इ.स. १७८३ म यहान अकाल पडे आन् पुरो भानगढ उजड गयो .
* येक मान्यता कऽ अनुसार भानगढ मान सिंग ( पह्यलो ) न आपलऽ नानो भाई माधो सिंग साठी बनायतो . किल्ला को नाव आपलऽ दाआजी ( भान सिंग ) क नाव पर ' भानगढ़ ' ठेये . तब माधो सिंग अकबर क फवूज म जनरल पद प होतों .
देऊर : भानगढ म भगवान सोमेस्वर , गोपीनाथ , मंगला देवी आन् केसव राय को देऊर स . आब सोमेस्वर क देऊर म वोन च सिंधु सेवडा तांतरिक का वंसज पूंजा पाठ करस .
# असी अजब गजब भानगड स भानगढ़ की..!!!
पधारो म्हारे देस....
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर .
अद्भुत इतिहास की जानकारी
ReplyDeleteधन्यवाद सर
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