Monday, November 9, 2020

अजब गजब - ३० : ईडाना माता. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

अजब गजब - ३० : ईडाना माता
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

राजस्थान क उदयपुर पासिन ६० कि.मी. दूर कुराबड - बम्बोरा रस्ता पर अरावली की पहाडी म मेवाड को मुख्य स्यक्तिपीठ ईडाना माता को दरबार स . राजपूत समाज आन् पुरऽ मेवाड की ईडाना माय आराध्य स . यहान भक्त लोगना मन्नत ( नवस ) पुरी भया पर तिरसूल चढावस . संतान की मन्नत पुरी भया पर भक्त लोगना झुलो ( पारनो ) चढावस . लकवा की बिमारी ठीक भया पर चांदी नी त् लकडी कन् बनायो ती आंग को भाग चढावस . 
मूरती को इतिहास यहान क पुजारी ला बी ठाव नहाय . कयी बरस पह्यले यहान कोनी सिध्द बाबा तप करत होता . बाद मऽ लोग आवन ला लाग्या . 
ईडाना माय को दरस्यन २४ घंटा खुलो रव्हस . लकवा क बिमारी वाला रात म माय क आघऽ चवूक म सोवस . दुय नवरातरी म त यहान भारी भीड रव्हस . 
अग्निनहान : ईडाना माय की मूरती मह्यना म दुय तीन डाव जागरूत होस आन् आग कन् आंग धोवस . येनऽ उबारा म माय ला चढायी वा चुनरीना , धागा भसम होस . असा चमत्कारी अग्निनहान क कारन यहान माय को देऊर नी बने . आब पावतर या आग कसी लागस , येकी मालुमात कोनी ला च नहाय . जसी लोगना ला खबर लागस , बातच ईडाना माय को अग्निनहान देखन साठी भीड जमा होस . 
ईडाना माय को पुजारी सांगस क ईडाना माय पर जास्त बोझो भयो त माय खुदच ज्वालादेवी को रूप धारन करस . या आग हरु हरु खूब मोठीजात होय जास . येकी लपटना २० - २० फिट उठस . पर येक बात अऊर खास स क येन आग कन् माय को सिरफ सिंगार च जरस . बाकी चीज ला जरासी बी आस नी लागत . तेकन भक्त लोग येनऽ आग ला माय को ' अग्निनहान ' कोस . जी बी येनऽ आग का दरस्यन करस , वून की सबन इच्छा पूरी होस , असी मान्यता स . 
आस्था आन् चमत्कार की देवी ईडाना माय को ' ईडाना ' नाव उदयपुर मेवल की महारानी क नावकन् परसिध्द भये . 

लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर 

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