अजब गजब - २८ : भादवा माता धाम
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
मध्यप्रदेस क निमच पासिन १८ कि.मी. दूर ' भादवा माता धाम ' को चमत्कारी उपचार तीरथ स्थान स . पांढरऽ संगमरमर क स्यानदार देऊर म महामाया भादवा माता बिराजित स . चांदी क आसन प माय की मूरती स . आसन क आधार म नव दुरगा की मूरतीना दिसस . यहान आवनी वाला बिमार लोग , निरोगी होयकन् वापस आवस . भादवा माय क दरस्यन कन् सबन दुख को नास होस , आन् मन म भक्तिभाव जागरूत होस . देऊर म माता की अखंड जोत जर रहीस . भादवा माता धाम ला लकवा , कोढ , अंधरा भया लोगना साल भर आवस आन् सुदा होयकन् जास .
मान्यता : * भादवा माय रात म देऊर मिसिन निकरकन् बाहिर फिरस . बाहिर घुमन क बेरा जेपर माय की किरपा होस , वकी बिमारी खतम होस , असी मान्यता स .
* देऊर क आघऽ बावडी स . यहान को पानी पवितर गंगा जल सरखो च स . यी कुंड माय न खुद बनाये . बावडी क पानी कन् आंग धोये त बिमारी खतम होस . लोगना की बिमारी दूर करन साठी भादवा माय न येमिन पानी काढेतो , असी मान्यता स .
* जिन ला बिमारी पासिन आराम लागस वूई देऊर म खुकडो , बकरो दान करस . माय क आरती क बेरा मानुसना संग च वूई खुकडा , बकरा बी असा उभा रव्हस , जसा वूई बी आरती कर रह्यास , असोच लागस .
* कोनी कोनी भक्त आपली मुराद पुरी भया पर सोना , चांदी को डोरो बी चढावस .
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर
भादवा माता धाम की जय हो।
ReplyDeleteजय माता दी
Deleteखूब साजरी माहिती.
ReplyDeleteधन्यवाद सर
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