Friday, November 27, 2020

उम्मीद को कठान. bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

उम्मीद को कठान
( भोयरी कविता )
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

घाटो पूंजे पाचवी ला
लागी मांगऽ लसटान
असो भूलाये चकवो
सपनो च दानोफान ।धृ।

भयी बरसाद असी
बसुली को च पठान
माती म च सप गयी
भरोसा की सोयाबीन ।१।

आंबिया का गा संतरा
वोला कोन उतारेन
माती मोल वको भाव
कोन खेत ला तारेन ।२।

पराटी ला वोले पानी
तीसो कारी को कठान
ठंडी को नहाय पत्तो
उदासे गा गोयठान ।३।

गोंडा पिवरा पिवरा
तूर मिरवस मान
गहू सोला की वरना
देस हिरवा को दान ।४।

धुयार क दुलयी म
रोगराई आवतन
खुलऽ अगास क खल
करू केतरो जतन ।५।

कास्तकारी की कमान
दुय फसल को बान
कब लागे निस्याना प
कब अंधारी खदान ।६।

आस की च कास्तकारी
उम्मीद को स कठान
डांड भरू गा केतरा
जागो जाग स गठान ।७।

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर 

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