अजब गजब - ३४ : मेंढागड
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली
वर्धा जिला क कारंजा तहसील म नारा - सावरडोह सडक प डाखऽ हाथ प ' मेंढागड ' इ येक रिठो गाव स . खडकी नदी काठ को मेंढागड आपरऽ पेट म इतिहास , सरधा आन् अचंबा ला लुकायकन् पहाड क रूप म उभो स . अगल बगल क नारा , आजनादेवी , सावरडोह , पाड्डी ( पारडी ) सुसुंद्रा , बेलगाव , रिधापूर ( रिठ ) , खराळा , खापरी , तरोडा , वाघोडा , काकडा परसोडी असा १५/१६ गाव प मेंढागड की नजर रव्हस .
मेंढागड क मोठ्ठजात सिवार म दयतोबा , धनगवडी बुवा , सागाड्या देव बी स .
मेंढागड क इतिहास आन् मेंढागड बाबा की सरधा को बुलावो येनऽ दिवारी म आयो . १७/११/२०२० तारीख ला मु , मनोज भाऊ गोरे आन् विरु भाऊ चोपडे कारंजा परिन मेंढागड साठी निकऱ्या . पह्यलऽ गया सावरडोह ला नानेसर जी धंडाडे ( ज्ञानेश्वर धंडाळे ) क घर . वून न आन् नाना बावाजी साळुंके न मेंढागड की महिमा सांगी . वासिन अमोल धंडाळे ला संगऽ लेयकन् मेंढागड ला रवाना भया . नारा - सावरडोह सडक परिन मेंढागड की पांदन लागी . पांदन कन् जंगल म गया . रस्ता प सांबर की लेंडीना जागा जागा पर बगरीती . सिवार म सांबर , डुक्कर , हरन , बांदराना को उबद्रो फसल को नास करस . जंगल मिन खडकी नदी जवर गया . नदी म रेती क जागा प गोल गोल गोटाना को सातरोच सातरो . दगड खलतऽ उलिसी रेती . आजन का मोठा मोठा झाडना... नदी क दुसरऽ थडी प चमत्कारी मेंढागड बाबा क देऊर को दरस्यन भयो . देऊर क पासऽ कारऽ पास्यान की पाच तल्ला क बिलडिंग जेतरी उभी ठड्डी ! देऊर क जेवनऽ हाथ प उभी ठड्डी म वरतऽ जान साठी पायरीना स . मेंढागड बाबा की पूंजापाती करी , आसिरवाद लेये आन् आमी चार झन मेंढागड प पायरीना कन् चेंग्या . पुरऽ सिवार म या उच्ची जागा स . वासिन १५/१६ गाव को सिवार दिसस . या उच्ची जागा वरतऽ सवान स . किल्लो , गढ , बस्ती साठी येकदम साजरी जागा . आपलऽ पूरवजना न सुरकस्या आन् राज क हिसाबकन् बराबर जागा निवडीती . खलतऽ पानी , वरतऽ सुरकस्या ! यहान इतऽ उतऽ दिसस इतिहास काल का खंडाराना... १५ /१६ गाव की रखवाली करतो मेंढागड आन् मेंढागड बाबा !
मेंढागड क चारी बाजू न भोयर समाज का गावना . मेंढागड क माथा पर कयी मकान का दगडी जोताना दिसस . नानऽ मोठऽ मकान का जोताच जोता ! मातामाय , मरामाय को ठानो आन् हनुमान जी , सिवलिंग , गनेस जी की मोठी मूरतीना , नांदतऽ मेंढागड की निस्यानी ! आबाद मेंढागड की कथा कहानी ! पटवारी रिकार्ड को रिठो मेंढागड . कबअ येनच मेंढागड न देये भोयर संस्कृति ला आसरो . खडकी नदी न पाजे ममता को पानी ... कार नदी क कोरा म फली फुली जिंदगानी ! मेंढागड क माथा परिन दिसस भोयर संस्कृति को आयनो . येक येक जोतो ... वकऽ येक येक दगुड म दिसस बिन लिखी इतिहास की कहानी . तलवार आन् नागर बखर की भयी होयेन यहान पूंजा घर घर म ... मंग बगऱ्या चारी कितऽ ... जंगल साफ करे.. खेती करी.. पर मेंढागड आन् मेंढागड बाबा साठी की सरधा मन म धरकन् च ! वा सरधा आब बी स . जेनऽ मेंढागड न रखवाली करी ... पाले पोसे , वोला पूंजस भोयर !
पर यहान कोनती केतरी लढाई भयी , कोनती महामारी - अकाल आयो , कसो कोनतो राजपाट पलट्यो , येको भेद सिरफ मेंढागड बाबा ला च ठाव स !
मेंढागड बाबा : * मेंढागड बाबा किल्लेदार होतो , राजो होतो , संत महात्मा होतो क अजून कोनी , येकी जानकारी नहाय . पर वून को स्थान चमत्कारी जरुर स . मेंढागड बाबा की मूरतीना स्वयंभू स .
* पांढरो घोडो आन् वोपर पांढरी दाढी वाला मेंढागड बाबा क रूप को कयी लोगना ला साकस्यात आन् सपना म दरस्यन भयेस . पुरऽ तहसील म मेंढागड आन् मेंढागड बाबा को आस्कारो आन् वूसोच दरारो बी स .
* सिधऽ मानुस साठी सिधा आन् टेढा साठी बखेडा , असी मेंढागड बाबा की मान्यता स .
* मेंढागड बाबा को इतवार आन् बुधवार इ दिन स . चयीत मह्यना म हर इतवार आन् बुधवार ला मेंढागड बाबा की यातरा भरस . चयीत , बयस्याख म खडकी नदी को पानी आटस . तब सयपाक करनी वाला नदी म का गोटा रेती बाजू करकन् येक दुय फुट को भिरो / हिरो खंदस . वोमिन साफ उज्जर पानी आवस . वोमिन पानी भऱ्या बास्त थोडऽ बेरा म वू पानी गायब होस . दुसरो कोनी आयेन त वोला दुसरो भिरो खंदनो लागस .
* नदी क झाड प आग्या मोह्यरजना स . पन सयपाक , पूंजापाती करनी वाला ला वूई तरास नी देत . पर धरम को रिवाज तोड्ये त् वूई सोडत नी , असी मान्यता स .
* आखाडी , दसरो - दिवारी , पोह्यती असऽ हर तिवार ला लोगना मेढागड बाबा की पूंजा करस . कोनीक्यान बिह्या - वास्तुक आन् कोनतो बी काज होयेन त् वोकी पतरिका पह्यले मेंढागड बाबा ला चढावस . खेत फसल को काम होयेन , देस परदेस जान को होयेन त् पह्यले मेंढागड बाबा को आसिरवाद लेस . बयसाख म यहान महापरसाद रव्हस .
* मेंढागड बाबा नवस / मन्नत ला पावस , असी लोगना की आस्था स . वहान खुकडा - बकरा की कंदुरी करस . मेंढागड बाबा पह्यलऽ उघडाच होता . जेला पूंजा करन की होयेन वूई चार डेरी - खाकरीना को मांडो डावत होता . आब वहान देऊर बनेस .
दुरघटना : इ. स. २०१७ क मयी मह्यना म यहान नागपूर को उकल्ले कुटुंब कंदुरी साठी आयाता . संजय उकल्ले की लाडी नलिनि बोरी ( म्हरो गाव ) क चौधरी कुटुंब की . कंदुरी साठी बोरी आन् बडचिचोली ( पाठे ) का नातलग बी होता . नलिनी बाई मोबाईल प बोलत होती . तबच वहान इज पडी . नलिनी बाई को जागा पर च जीव गयो . बाकी लोगना ला दवाखाना म भरती करनु पडे .
# मेंढागड ला साल भर लोगना पूंजापाती करन साठी जास . यातरा बी भरस . पर रस्ता आन् सुबिधा को अभाव स .
# मेंढागड इतिहास को खजानो स पर सरकार आन् नेता लोगना ध्यान देयेन त वोको जतन होयेन .
जय मेंढागड बाबा....
लेखक : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर .
जय मेंढागढ बाबा की जय , खुब साजरो लिखान
ReplyDeleteधन्यवाद मनोज जी
Deleteवाह बहुत बढ़िया
ReplyDeleteधन्यवाद सर
Deleteअप्रतिम कल्पकता ।।।सुन्दर विवेचन ।। असीच वाटचाल सुरु असु दया ।।
ReplyDeleteधन्यवाद सर
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