Wednesday, February 16, 2022

लगनसराई ( भोयरी कविता ). bhoyar culture _ भोयर संस्कृति. bhoyari dialect _ भोयरी बोली

लगनसराई
Bhoyar culture _ भोयर संस्कृति
Bhoyari dialect _ भोयरी बोली

भयी गो उलंगवाडी
आब स निचनताई
निपट्यो साखरपुडो 
आब बिह्या की जी घाई ।१।

मोह्यतूर क ठोक ला
हाल वाला की कमाई
सोनो - नानो , अहिर ला
खरचीस पाई - पाई ।२।

उधारी पर किरानो
सहारो बहिन भाई
हात उसनी रकम
सूट , दायजा म गयी ।३।

घरदार म धांधल
हरद न् देवादेवी
घराती बराती कन् 
घाडी रवनक आई ।४।

हर रोज की खरिदी
बाटी पतरिका भायी 
दाहा डेरी क मांडो ला
सूते बहिन - जवाई ।५।

बिह्या वरी हासी खूसी
होस आसू न बिदाई
दुय कुटुम्ब को मेर
करस लगनसराई ।६।

रचना : सुरेश महादेवराव देशमुख , नागपूर

2 comments: